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बाह बिल्लू भाई साहब बाह

पान बनाना व्यवसाय से कहीं ज्यादा कला है। हर दुकान पर पान का पत्ता वही और उसमें इस्तेमाल किये जाने वाला कत्था, चूना, सुपारी….एक जैसे, लेकिन तासीर अलग, स्वाद जुदा। असल में यह सब पान बनाने वाले के हुनर का कमाल होता है और इस काम में हमारे शहर के बिल्लू भाई को उस्ताद समझिए। तभी तो पान के शौकीन तमाम खास लोग कम से कम रात को जरूर उनके ठिकाने पर आते हैं। कई आम लोग भी कभी-कभार सिर्फ इसलिए बिल्लू भाई का पान खाने चले आते हैं, ताकि वे भी खुद को खास फील कर सकें। अगर आप पूछेंगे कि ऐसा क्या विशेष है बिल्लू भाई के पान में। तो यह जानने के लिए कभी आइए उनकी दुकान पर। बताइए उन्हें कि आप किस तरह का पान पसंद करते हैं। मसलन पत्ता कौन सा, कत्था और चूने की मात्रा कितनी, सुपारी कैसी…तय मानिए कि यदि आपका चेहरा जरा भी खास हुआ तो फिर दोबारा कभी भी जाएंगे तो आपको कुछ भी बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि बिल्लू भाई पहली बार में ही हरेक शौकीन की पसंद रट चुके होते हैं। अनेक लोग ऐसे हैं जो किसी को भी उनके यहां भेजकर कहते हैं कि बस बिल्लू भाई से बोलना कि फलां आदमी ने भेजा है, वे झट से उसकी पसंद का पान लगा देंगे। मैं नियमित पान नहीं खाता, महीने, दो महीने में कभी-कभार यदि कोई ऑफर करे तो। लेकिन उन्हें मेरी पसंद भी मालूम है। एक-दो बार मित्रों ने जब मुझसे पूछा कि कैसा पान लोगे, तो बिल्लू भाई तपाक से बोल पड़े कि मुझे पता है उनकी पसंद। मित्र हैरत में पड़ गए। बोले, यार तुम तो पान खाते नहीं, फिर भी….। कुछ और खासियत भी हैं। जैसे कि दुकान पर ग्राहकों की खूब भीड़ के बावजूद बिल्लू भाई के चेहरे पर मुस्कराहट। पान बनाते वक्त हरेक व्यक्ति से उसकी रुचि का वार्तालाप या फिर शहर के किसी खास मसले पर चर्चा…। इस खूबी के साथ तैयार किये जाने वाले पान में स्वाद न आये यह हो ही नहीं सकता। कभी हमारे शहर आना हो तो स्टेशन के ठीक सामने मार्कण्डेश्वर मंदिर के पास बिल्लू भाई से मुलाकात जरूर करियेगा। मेरा दावा है कि उनका पान और व्यवहार आपका दिल जीत लेगा❤पान बनाना व्यवसाय से कहीं ज्यादा कला है। हर दुकान पर पान का पत्ता वही और उसमें इस्तेमाल किये जाने वाला कत्था, चूना, सुपारी….एक जैसे, लेकिन तासीर अलग, स्वाद जुदा। असल में यह सब पान बनाने वाले के हुनर का कमाल होता है और इस काम में हमारे शहर के बिल्लू भाई को उस्ताद समझिए। तभी तो पान के शौकीन तमाम खास लोग कम से कम रात को जरूर उनके ठिकाने पर आते हैं। कई आम लोग भी कभी-कभार सिर्फ इसलिए बिल्लू भाई का पान खाने चले आते हैं, ताकि वे भी खुद को खास फील कर सकें।
अगर आप पूछेंगे कि ऐसा क्या विशेष है बिल्लू भाई के पान में। तो यह जानने के लिए कभी आइए उनकी दुकान पर। बताइए उन्हें कि आप किस तरह का पान पसंद करते हैं। मसलन पत्ता कौन सा, कत्था और चूने की मात्रा कितनी, सुपारी कैसी…तय मानिए कि यदि आपका चेहरा जरा भी खास हुआ तो फिर दोबारा कभी भी जाएंगे तो आपको कुछ भी बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि बिल्लू भाई पहली बार में ही हरेक शौकीन की पसंद रट चुके होते हैं। अनेक लोग ऐसे हैं जो किसी को भी उनके यहां भेजकर कहते हैं कि बस बिल्लू भाई से बोलना कि फलां आदमी ने भेजा है, वे झट से उसकी पसंद का पान लगा देंगे।
मैं नियमित पान नहीं खाता, महीने, दो महीने में कभी-कभार यदि कोई ऑफर करे तो। लेकिन उन्हें मेरी पसंद भी मालूम है। एक-दो बार मित्रों ने जब मुझसे पूछा कि कैसा पान लोगे, तो बिल्लू भाई तपाक से बोल पड़े कि मुझे पता है उनकी पसंद। मित्र हैरत में पड़ गए। बोले, यार तुम तो पान खाते नहीं, फिर भी….।
कुछ और खासियत भी हैं। जैसे कि दुकान पर ग्राहकों की खूब भीड़ के बावजूद बिल्लू भाई के चेहरे पर मुस्कराहट। पान बनाते वक्त हरेक व्यक्ति से उसकी रुचि का वार्तालाप या फिर शहर के किसी खास मसले पर चर्चा…।
इस खूबी के साथ तैयार किये जाने वाले पान में स्वाद न आये यह हो ही नहीं सकता।
कभी हमारे शहर आना हो तो स्टेशन के ठीक सामने मार्कण्डेश्वर मंदिर के पास बिल्लू भाई से मुलाकात जरूर करियेगा। मेरा दावा है कि उनका पान और व्यवहार आपका दिल जीत लेगा❤ रिपोर्ट यूनिक टुडेे न्यूज मुरैैैैना