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सरकारी भवनों की छत पर अनाधिकृत रूप से सुरक्षित रखी कर्वी इमारतों को नेस्तनाबूद करने के लिए पर्याप्त

(एसबीएस/अरविंद सिंह राजावत)
चकरनगर/इटावा,6 जनवरी। जहां एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन दिन और रात सरकारी इमारतों पर कब्जा हटवाने के लिए जी जान से जुटा हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ निचले स्तर के अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की आंख में धूल झोंक कर अपने मंसूबों के अनुसार कार्य करने में महारत हासिल किए हुए हैं।

    बताते चलें कि सरकार और जिला प्रशासनिक अधिकारी सरकारी इमारतों से अनाधिकृत कब्जों को जो दबंगों के द्वारा किए गए हैं उन्हें हटवाने के लिए और जो सरकारी संपत्ति पर अपना एकाधिकार किए हुए हैं उन से बेदखल करने के लिए प्रशासन जी जान से जुटा हुआ हैं, लेकिन उनके मातहत अधिकारी शासन के नियमों को ताक में रखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं दे रहे हैं जिसका जीता जागता उदाहरण चित्र से स्पष्ट होता है कि उप स्वास्थ्य केंद्र गढ़ाकास्दा जिसका निर्माण लाखों रुपए खर्च कर सरकार ने जनता की सुविधा के लिए स्थापित किया लेकिन इस भवन का कोई भी सदुपयोग जनहित में नहीं हो रहा है। सूत्रों की माने तो कई वर्ष पूर्व जो एनम की नियुक्ति थी उसकी मृत्यु के बाद आज तक कोई भी एनम की नियुक्ति नहीं की गई इतना ही नहीं इस सरकारी इमारत पर लोग अतिक्रमण करने में भी नहीं चूक रहे हैं। छतों पर लदी कर्वी इस बात का संकेत दे रही है यह इमारत किसी प्राइवेट व्यक्ति के कब्जे में है। कर्वी से छत को होने वाला भारी नुकसान भी संभव है रखी कर्वी से बरसने वाला पानी परनालों से नहीं निकल पाएगा या उस पर सड़न पैदा होकर सीमेंट की छत को गला कर नेस्तनाबूद कर इमारत को धराशाई कर देगी। इस प्रक्रिया का समाचार समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद भी किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं की। कार्यवाही तो दूर मौके पर जाकर देखा भी नहीं। 

   चित्र में नीचे दूसरी सरकारी इमारत दुग्ध संग्रह केंद्र के नाम से है। सूत्रों की माने तो इस भवन को विकासखंड की संस्तुति पर सरकारी मदद से बनाया गया है जिस पर बरसों से ताला लटका हुआ है लोग इमारत को कब्जा करने के उद्देश्य से इसकी छत पर भी कर्वी लादकर छत को क्षतिग्रस्त करने का मंसूबा बनाए हुए हैं। मुख्य विकास अधिकारी व जिलाधिकारी इटावा से मांग की गई है उक्त दोनों भवनों पर हो रहे अनाधिकृत कब्जों को हटाया जाए और इनकी देखरेख सुनिश्चित की जाए ताकि यह इमारतें क्षतिग्रस्त ना हों। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस पर कितना संज्ञान लेते हैं और क्या कार्यवाही करते हैं यह भविष्य के गर्त में?

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