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काश… कमलनाथ यह वादा भी याद रख पाते

श्रीगोपाल गुप्ता

मध्यप्रदेश के नवांतुक मुख्यमंत्री कमलनाथ सोमवार को शपथ लेने के साथ ही एक्सन मोढ़ में आ गये। एक तरफ जहां उन्होने अपनी सरकार बनने से पूर्व प्रदेश की जनता व किसानों से किये गये वादों को अमली जामा पहनाने का काम शुरु कर दिया वहीं वर्षों से एक जगह जमे नोकरशाहों को इधर से उधर करने का अपना काम भी शुरु कर दिया। इससे आम जनता में उनकी और उनकी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्वीकार्यता में बृद्धी हुई तो उनके प्रति जनता में न्ई आशाओं का संचार नये शिरे से शुरु हो गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ग्रहण के तुंरत बाद कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही कांग्रेस के वचन-पत्र में प्रदेश के किसानों को दिये गये वचन की पूर्ती करते हुये तत्काल प्रभाव से उनका दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ कर दिया। ये काम उन्होने बिना समय गंवाये इतना तुरत-फुरत तरीके से किया कि 10 दिन की समय सीमा में कर्ज माफ न होने की दशा में बड़ा आंदोलन खड़ा करने की चेतावनी देने वाले विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के हाथों से शुरुआत में ही बड़ा मुद्दा खिसक गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व वचन-पत्र के अनुसार कांग्रेस की सरकार बनने के 10 के अंदर प्रत्येक किसानों का दो लाख रुपयों तक कर्ज माफ करने का वादा किया था, मगर कमलनाथ ने आशा के बिपरीत कार्यभार संभालने के मात्र तीन घंटों के अन्दर ही किसान कर्ज माफ की फाईल से ही हस्ताक्षर करना शुर किया।

प्रदेश के अठाहरवें मुख्यमंत्री के रुप में शपथ लेने वाले कमलनाथ के हाथ यहीं नहीं रुके। उन्होने बृद्धा पेंसन 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये, बेटियों की शादी में सरकार द्वारा दिये जाने वाले अनुदान की राशी 26000 से बढ़ाकर 51000 रुपये, महिला डिलेवरी के 16000 से बढ़ाकर 26000 हजार रुपये, और प्रत्येक ग्राम पंचायतों में गोशाला खोलने जैसे विभिन्न वचनों की फाईलों पर हस्ताक्षर कर कांग्रेस के चुनावी वादों को अमली जामा पहनाने का काम कर दिखाया। इसके साथ ही कमलनाथ ने मुख्य सचिव को कांग्रेस द्वारा चुनाव में जारी वचन-पत्र की प्रति सौंपकर बाकी के वचनों को भी तय समय-सीमा में पूरा करने की हिदायत भी दी। मगर वचन-पत्र में जनता को सरकार बनने पर दिये गये वचनों को पूरा करने की आपा-धापी में कमलनाथ देवालपुर की एक आमसभा में प्रदेश की जनता को दिये गये अपने एक महत्वपूर्ण वचन को भूल गये? दरअसल देश में बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के विरोध में कांग्रेस द्वारा गत 10 सितंबर को ‘भारत बंद ‘के दौरान कमलनाथ प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने की नसीहत दे रहे थे। उन्होने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से हलकान जनता को राहत देते हुये राजस्थान की मुख्यमंत्री बंसुधरा राजे ने वैट कम करके जनता को राहत दी है वैसे ही शिवराज भी वैट कम कर के वो दोगुना मध्यप्रदेश की जनता को राहत दे। कमलनाथ यहीं नहीं रुके उन्होने प्रदेश की जनता को वचन देते हुये उक्त जनसभा में कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो कांग्रेस सरकार का सबसे पहला काम ही वैट कम कर पेट्रोल पर पांच रुपये और डीजल पर तीन रुपये तत्काल कम किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में पेट्रोल पर 28प्रतिशत और डीजल पर 22 फीसदी वैट(कर) है। मगर ऐसा लगता है कि अति व्यस्तता और वचन पूरा करने की आपा-धापी में वे शायद इस महत्वपूर्ण वचन को भूल गये? इधर जनता की आवाज बनने का संकल्प लेने वाला और यदि किसानों का कर्ज तय सीमा 10 दिन के अन्दर माफ न करने की सूरत में बड़ा आंदोलन खड़ा करने की उम्मीद पाले बैठा विपक्ष (भाजपा ) भी इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को मुख्यमंत्री को याद दिलाने में नाकाम रहा। बहरहाल काश… कमलनाथ अपने इस वादे को भी याद कर लेते और पेट्रोल-डीजल पर वैट कम कर दाम में पांच रुपये और तीन रुपये रियायत कर देते तो एक तरफ जनता में उनकी विश्वनियता का ग्राफ बढ़ जाता वहीं मंहगाई के बोझ तले दब रही प्रदेश की जनता कुछ राहत महसूस कर सकती थी।

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