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हाथरस में पुलिस प्रशासन की नाकामी आई सामने, अपनी नाकामी छिपाने गांव को किया सील, योगी सरकार की हो रही जमकर छीछालेदर

परानिधेश भारद्वाज की रिपोर्ट

हाथरस में एक बेटी के साथ हुई बर्बरता ने फिर से देश को शर्मसार कर दिया है। निर्भया कांड में दोषियों को फांसी दिए जाने के बाद भी हैवान अपनी हैवानियत से बाज नहीं आ रहे हैं और उसी की परिणिति हुई हाथरस में। हाथरस में हुई दरिंदगी के बाद पूरे देश मे आक्रोश व्याप्त है। जमकर प्रोटेस्ट चल रहे हैं, एक बार फिर से दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा देकर हैवानों को सबक सिखाने की मांग उठ रही है। लेकिन हाथरस की घटना के बाद उत्तरप्रदेश पुलिस ने जिस प्रकार से अपना रिएक्शन दिया है और जिस प्रकार से अभी पुलिस एक्ट कर रही है उसने आग में घी डालने का काम किया है। इससे उत्तरप्रदेश पुलिस प्रशासन की नाकामी तो सामने आ ही रही है भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार की जमकर फजीहत भी हो रही है।

क्या मामले को दबाने में जुटा हुआ है पुलिस प्रशासन?
एक बेटी के साथ दरिंदगी हुई! खुद बेटी ने अपने साथ हुई घटना के बारे में बयान दिया। लेकिन जिस प्रकार से एफएसएल रिपोर्ट में बताया गया कि बलात्कार हुआ ही नहीं, जिस प्रकार से आनन फानन में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया और फिर जिस प्रकार से परिजनों को घर में नजरबंद या कहें कैद कर दिया गया और किसी से बोलने की इजाजत नहीं दी जा रही उससे दाल में कुछ तो काला नजर आ रहा है! आखिर पुलिस प्रशासन ऐसा क्या छिपाने की कोशिश कर रहा है जो जनता के सामने नहीं आने देना चाहता? सारे घटनाक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन पर तमाम सवाल उठ रहे हैं आखिर उसकी मंशा क्या है? अगर परिजन वीडियो बनाकर भेज रहे हैं तो पुलिस द्वारा उनके मोबाइल फोन छीने जा रहे हैं। उनको निकलने नहीं दिया जा रहा है।जैसे तैसे एक बालक चारा काटने के बहाने पुलिस की बंदिशों से बाहर निकला और अपनी बात मीडिया के सामने रखी कि परिजन मीडिया से बात करना चाहते हैं लेकिन उन्हें बात नहीं करने दी जा रही है। पहले भी घटनाएं हुईं हैं, पहले भी कई मामलों में छानबीन हुई है लेकिन क्या इतनी पाबंदियों के बीच ही जांच हुई है? तमाम सवाल पुलिस प्रशासन पर खड़े हो रहे हैं।

आखिर क्यों लगाई जा रही है मीडिया के सामने परिजनों के बोलने पर पाबंदी?
हाथरस कांड के बाद पुलिस ने आनन फानन में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया और सबसे बड़ी बात कि परिजनों को भी बेटी के अंतिम संस्कार से दूर रखा गया। और इन सबसे ऊपर सवाल यह है कि आखिर परिजनों को बोलने से क्यों रोका जा रहा है? आखिर संविधान में जो बोलने की आजादी दी गयी है उसका गला क्यों घोंटा जा रहा है? आखिर क्या छिपाना चाहता है उत्तरप्रदेश का पुलिस प्रशासन? आखिर क्यों सरकार की छीछालेदर करने पर उतारू है पुलिस प्रशासन? घटना के बाद जिस प्रकार का व्यवहार हाथरस पुलिस द्वारा किया जा रहा है और जिस प्रकार की पाबंदियां पुलिस प्रशासन द्वारा लगाई गईं हैं, वह पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहीं हैं, साथ ही भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार की जमकर किरकिरी भी कर रही हैं।

पुलिस प्रशासन के रवैये का सरकार को भुगतना पड़ सकता है खामियाजा!

हाथरस में पुलिस प्रशासन द्वारा जिस प्रकार का रवैया अपनाया जा रहा है उसका खामियाजा अधिकारियों को तो ना के बराबर भुगतना पड़ सकता है। ज्यादा से ज्यादा उनका तबादला कर दिया जाएगा या फिर सस्पेंड कर जांच बिठाकर कुछ समय बाद फिर से बहाल कर दिया जायेगा। लेकिन जो फजीहत इस पूरे प्रकरण से उत्तरप्रदेश में भजपा की योगी सरकार की हो रही है उसका नुकसान सरकार को उठाना पड़ सकता है। सरकार को इससे बड़ा नुकसान हो सकता है।

अभी भी समय है कि पुलिस प्रशासन चेत जाये और परिजनों को बंधनों से मुक्त करे। साथ ही उनको बोलने की आजादी भी दी जाये आखिर उनकी बेटी के साथ क्या हुआ? बेटी ने अंतिम समय में उनको क्या क्या बताया? आखिर वह क्या चाहते हैं? उनको कम से कम बोलने तो दिया जाए। अपनी बात कहने की आजादी तो दी जाये।

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