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वरिष्ठ जननेताओं को सम्बोधित करने के लिए अपना व्याकरण सुधारें पार्षद ‘मिन्टू’।

दादा गजराज सिंह जी का ‘एकवचन’ की भाषा में उल्लेख बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

वृन्दावन सिंह जी पर भी राजनैतिक से ज्यादा व्यक्तिगत टिप्पणियाँ की गई हैं जो किसी भी पीढ़ी के लिए असहनीय हैं

मुरैना, 28 जुलाई, 2020। मुरैना जिले ने आजादी से लेकर अब तक जो जननेता दिए हैं उनमें चाहे स्व. जाहर सिंह कक्का हों, या स्व. सोवरन सिंह मावई जी या उत्तरकाल के दादा गजराज सिंह जी हों या रुस्तम सिंह जी अथवा मुंशीलाल जी हों या मेहरबान सिंह जी रावत या श्री रामनिवास जी।
इन सभी जननेताओं का निर्माण लोगों से जुड़ाव के द्वारा हुआ। चाहे वे किसी भी दल के रहे हों। इस वरिष्ठ श्रेणी में और भी नाम हैं जो एक दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ते हुए भी कभी मर्यादित भाषा का उल्लंघन नहीं करते रहे।

नाले में कूदकर जनमत का निर्माण करने की अपेक्षा रखने वाले युवा पार्षद ‘मिन्टू’ ने प्रेस-विज्ञप्ति जारी कर वरिष्ठ राजनेता वृन्दावन सिंह सिंह सिकरवार के सम्बन्ध में जो कुछ लिखा है वह राजनैतिक बयान न होकर मुरैना के संस्कारों और भाषायी मर्यादा की रेखा लांघने का कुत्सित प्रयास किया है। डॉक्टर साहब गोविंद सिंह जी और वृदावन सिंह जी के पारस्परिक राजनीतिक संवाद में अपने “बोल-बच्चन” डालकर पार्षद मिंटू ने शेरों की हुंकार के बीच ‘सियार-रुदन’ मिलाने की कोशिश की है।

इसी विज्ञप्ति में पार्षद ‘मिन्टू’ ने लिखा है- ‘‘उनका एक भाई भाजपा में है’’ इस भाषा शैली में दादा गजराज सिंह जी ही नहीं, ग्वालियर-चम्बल अंचल के किसी भी वरिष्ठ राजनेता से किसी भी दल का व्यक्ति उल्लेख नहीं करता।

पार्षद मिन्टू स्वयं को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं तो अपने अंचल की जननेताओं पर राजनैतिक कटाक्ष करने से पहले अपना व्याकरण सुधार लेें। दादा गजराज सिंह सहित हमारे अंचल के वरिष्ठ जननेता किसी परिचय के मोहताज नहीं है और राष्ट्रीय स्तर तक प्रत्येक पार्टी के संगठन में इन सभी का नाम आदर से लिया जाता है।

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