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हिचकोले खाता भारतीय चुनाव आयोग

             श्री गोपाल गुप्ता   

आजकल इस कोरोना महामारी में भारतीय चुनाव आयोग अपने ऊंप-पटांग फैसलों और करनी-कथनी के कारण एक तरफ देश की अन्य संविधानिक संस्थाओं की तरह वर्तमान हुक्मरानों के दबाव में लुटता-पिटता दिखलाई पढ़ रहा है तो वहीं देश और दुनिया की नजर में हंसी का पात्र बन रहा है! आलम यह हो गया है कि उसे अपने कहे पर ही विश्वास नहीं होता, वो गुजरात और हिमाचल विधानसभा के चुनावों की तारीखों का ऐलान 12.30 बजे करता है जबकि सत्तारुण पार्टी का एक छुटभैया नेता 11 बजे ही तारीखों का ऐलान कर देता है! उसकी पारखी नजर में चुनाव के समय लागू आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद प्रधानमंत्री, ग्रहमंत्री या फिर सत्तारुण पार्टी का टुच्चा सा नेता सरेआम चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुये साम्प्रदायिक भाषण दें या चुनाव में जातिगत उन्माद फैलायें, मगर इसका केवल उन्हें क्लीन चिट ही देना है जबकि विपक्षी दलों के नेताओं को निचोड़ना है! ताजा मामला यूं है कि गत 21 जुलाई को देश के विभिन्न राज्यों में 45 लोकसभा व राज्य विधानसभाओं के चुनाव आवश्यक रुप से सितम्बर माह तक होने हैं!इनमें सर्वाधिक महत्व मप्र. विधानसभा का है, जहां कांग्रेस के 25 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा देकर कांग्रेस की कमलनाथ का तख्ता पलटते हुये भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया, इनमें से 14 पूर्व विधायक शिवराज सिंह की भाजपा सरकार मंत्रिमंडल में मंत्री भी हैं! 13 मार्च को दिये गये इस्तिफों के कारण नियमानुसार 13 सितम्बर तक आयोग को उपचुनाव कराना आवश्यक है ,इसके अलावा प्रदेश में जौरा से कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा और आगर से भाजपा मनोहर ऊंटवाल के निधन के कारण भी उपचुनाव काफी समय से लंबित हैं! इस बाबत गत 21 जनवरी को दिल्ली में एक निजी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनिल कुमार अरोड़ा से प्रश्न किया तो उन्होने पूरी दमदारी के साथ कहा कि मप्र विधानसभा सहित देश के 45 लंबित लोकसभा-विधानसभाओं के चुनाव सितम्बर महिने के आखिरी तक करा लिये जायेंगे!

उन्होने एक कदम बढ़ते हुये कहा की आयोग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है और इसके बाद बिहार में भी तय 29 नबवंर से पूर्व विधानसभा के चुनाव भी आयोग करा लेगा! इसके साथ ही उन्होने कहा कि आयोग का होने वाले उपचुनाव और बिहार चुनाव के लिये प्रस्तावित जिलों में फैले हुये कोरोना संक्रमण की दिन-प्रतिदिन की स्थिति पर नजर रखे हुये है और चुनाव कराने में बाधा नही हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त की इस घोषणा के मात्र 48 घण्टे में ही चुनाव आयोग द्वारा कानून मंत्रालय को लिखित में ड्राफ्ट भेजा और कहा गया विभिन्न राज्यों में होने वाले 45 उपचुनाव कोरोना महामारी को देखते हुए सितम्बर में कराना संभव नहीं है, अतः उपचुनावों को फिलहाल निरस्त किया जाता है!इस पर जब काफी हो-हल्ला मचा और चुनाव आयोग की साख पर अंगूली उठी तो एक दिन बाद ही 24 जुलाई को आयोग ने बंदर गुलाटी खाते हुये पुनः उपचुनाव तय समय-सीमा में कराने घोषणा को अंजाम दे दिया! ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि समय पर उपचुनाव कराने में कोरोना डर आखिर किसको लग रहा है? सरकार को या फिर आयोग को? क्योंकि सूत्रों के अनुसार भोपाल में चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांच दिवसिय चिंतन शिविर का नेतृत्व कर रहे संघ प्रमुख मोहन भागवत को जो फीडबैक मिल रहा है वो तोड-फोड़ करके बनी भाजपा की शिवराज सिंह के पक्ष में तो कतई नहीं है! कोरोना से निपटने में नाकामी, रोज-रोज लाॅकडाऊन से परेशान व्यापारी और आमजन ,प्रवासी मजदूरों के साथ हुई नाइंसाफी, कांग्रसी विधायकों द्वारा कांग्रेस की सरकार गिराने सहित कई मुद्दों पर प्रदेश की जनता भाजपा से नाराज है, अतः उपचुनाव आगे बढ़ जायें तो जनता को मनाने के लिए समय मिल जायेगा! इसी को देखते हुए लोग कयास लगा रहे थे की आयोग सत्तारुण पार्टी की भाषा बोल रहा है! मगर विपक्षी दल और जनता समय पर होने वाले उपचुनाव की घोषणा से काफी प्रफुल्लित है! हालांकि हाल ही के वर्षों में आयोग की साख को जो बट्टा लगा है उससे जाहीर है उसकी स्थिति ठीक उस पानी के जहाज जैसी हो गई है जो जबर्दस्ती तूफान की आशंका से ही हिचकोले खाने लगता है!

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