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डीआईजी की ताबड़तोड़ कार्यवाही से पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में

जिनके मंत्रित्व काल में आये एसपी उन्होंने भी एसपी को लिया आढ़े हाथों, दी सुधरने की चेतावनी। कहा जाने नहीं देंगे यहीं रखकर सुधारेंगे।

परानिधेश भारद्वाज / पंकज द्विवेदी ।

भिंड जिले में सिंध नदी पर स्थित रेत खदानों से बड़ी मात्रा में रेत का अवैध उत्खनन किया जाता है और यह काम स्थानीय पुलिस के संरक्षण में किए जाने की जानकारी अक्सर सामने आती रहती है। लेकिन बीते 15 दिनों में चंबल के नवागत डीआईजी राजेश हिंगणकर की कार्रवाई से रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में स्थानीय पुलिस की संलिप्तता की पोल खुल गई है। वहीं रेत माफिया भी दहशत में आ गया है। डीआईजी की कार्यवाही से भिंड एसपी नगेन्द्र सिंह के साथ ही जिला पुलिस की बेहद किरकिरी हो रही है। वहीं डीआईजी राजेश हिंगणकर के कार्य की हर कोई सराहना कर रहा है। उनके द्वारा रेत के अवैध उत्खनन में संलिप्तता के चलते सस्पेंड किये गए सभी थाना प्रभारियों को पीएचक्यू द्वारा आदेश निकालकर भोपाल पीएचक्यू में ही अटैच किया गया है। बताया जा रहा है कि डीआईजी द्वारा आईजी के निर्देशन में पूरी कार्यवाही को अंजाम दिया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस अधीक्षक के साथ आये एक प्रधान आरक्षक और एक आरक्षक चालक जिले में थाना प्रभारियों से वसूली कर रहे थे और रेत के अवैध कारोबार में संलिप्त थे। जिसकी पुष्टि डीआईजी द्वारा दोनों को सस्पेंड किये जाने के आदेश में की गयी है।

रेत का उत्खनन नदियों से आम बात है लेकिन बीते कुछ वर्षों में रेत सोने की तरह बिक रहा है। जिसके चलते बड़े पैमाने पर रेत खदानों से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ ही बड़े-बड़े नेताओं से लेकर पुलिस की संलिप्तता की बातें सामने आती रहती हैं। भिंड जिले में अवैध रेत उत्खनन में पुलिस की संलिप्तता की कलई उस समय खुली जब चंबल के नवागत डीआईजी राजेश हिंगणकर ने एक के बाद एक ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई करते हुए कई थाना प्रभारियों को सस्पेंड कर दिया। 15 दिन पहले डीआईजी ने रात के अंधेरे में रेत खदानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए तीन थाना प्रभारियों को निलंबित किया था और मशीनों सहित बड़ी मात्रा में रेत के भंडार जब्त किए थे, वहीं 2 दिन पहले भी 46 डिग्री तापमान के बीच भरी दुपहरी में रेत खदानों पर छापामार कार्यवाही कर दो थाना प्रभारियों को निलंबित किया गया और यहां से भी बड़ी मात्रा में अवैध रेत के डंप को जप्त कर माइनिंग विभाग को कार्रवाई के लिए कहा गया।

डीआईजी द्वारा जप्त रेत को चुराया रेत माफियाओं ने
मंगलवार को डीआईजी द्वारा जब्त किए रेत को भी रेत माफिया द्वारा चुरा लिया गया। रेत माफिया ने जप्त किए गए रेत में से लगभग आधा रेत मशीनों के जरिये गाड़ियों में भरकर चोरी कर लिया। इस बात की भनक जैसे ही गुरुवार को मीडिया के सामने आई तो मीडिया के लोग सूचना की पड़ताल के लिए मौके पर पहुंच गए। एक डंप से लोडर के जरिये डंपर में रेत भरा जा रहा था। मीडियाकर्मियों ने जब इसका फोटो खींचने और वीडियो बनाने के लिए अपने मोबाइल चालू किए तो एक बोलेरो गाड़ी में बैठे रेत माफिया आकर पत्रकारों को धमकाने लगे। एक पत्रकार से मोबाइल मांगने लगे। जिस पर इसकी सूचना तत्काल डीआईजी को देने पर उनके निर्देश पर डीएसपी हेडक्वार्टर ने मौके पर पहुंचकर जब्त किए गए रेत को भर रहे एक डंपर को पकड़ लिया।

पुलिस अधीक्षक के साथ आये प्रधान आरक्षक एवं चालक आरक्षक पर लगे थाना प्रभारियों से वसूली एवं रेत के अवैध कारोबार में संलिप्त होने के आरोप
पुलिस अधीक्षक नगेन्द्र सिंह तीन महीने पहले ही श्योपुर से स्थानांतरित होकर भिण्ड आये। इस दौरान उनके साथ एक प्रधान आरक्षक मुकेश राजावत एवं एक चालक आरक्षक आशीष शर्मा भी साथ आये। जिसके बाद वह भिण्ड से वापस नहीं गए। उनके द्वारा जिले में रहकर थाना प्रभारियों से वसूली शुरू कर दी गयी एवं रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन में भी वह संलिप्त हो गए। जिसके बाद थाना प्रभारियों द्वारा इसकी शिकायत आईजी स्तर पर की गई। आईजी के निर्देशन में डीआईजी राजेश हिंगणकर द्वारा एक आदेश जारी कर दोनों आरक्षकों पर थाना प्रभारियों से अवैध वसूली एवं अवैध रेत उत्खनन में संलिप्तता का हवाला देते हुए दोनों को निलंबित कर डीआइजी कार्यालय अटैच किया गया। दोनों पुलिसकर्मियों के बचाव में दलील दी जा रही है कि वह पुलिस अधीक्षक को छोड़ने आये थे लेकिन लॉक डाउन के चलते उन्हें भिण्ड ही रुकना पड़ा। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी को लॉक डाउन में रिलीव कर रवानगी दी जा सकती है तो यह पुलिसकर्मी अपनी मूल पोस्टिंग पर वापस क्यों नहीं जा सके? जबकि इस बीच कई पुलिसकर्मियों को छुट्टियां दिए जाने की बात भी सामने आई हैं। लॉक डाउन में ही कई पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक जिले से दूसरे जिले में यात्रा की हैं फिर इन पुलिसकर्मियों को लॉक डाउन का हवाला देते हुए बचाने की बात समझ से परे है।

पुलिस अधीक्षक पर कार्यवाही ना किये जाने से राज्य सरकार की मंशा पर उठ रहे सवाल
म्बल आईजी डीपी गुप्ता के निर्देशन में डीआईजी द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ कार्यवाहियों के बाद अब सवाल यह उठ रहे हैं कि जब थाना प्रभारियों को सस्पेंड किया जा रहा है तो पुलिस अधीक्षक को क्यों बचाया जा रहा है। इससे राज्य सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं कि आखिर राज्य सरकार द्वारा पुलिस अधीक्षक पर कार्यवाही अभी तक क्यों नहीं की गई। जबकि बिना पुलिस अधीक्षक की जानकारी के थाना प्रभारी इतने बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन में संलिप्त नहीं हो सकते। ऐसे में प्रदेश के ईमानदार मुखिया शिवराज सिंह चौहान एवं तेजतर्रार ग्रह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा को तत्काल संज्ञान लेते हुये पुलिस अधीक्षक को हटाकर उनकी भूमिका की जांच की जानी चाहिये। हालांकि खबर आ रही है कि एसपी की कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक नाराजगी जता रहे हैं और ईमानदार छवि के दोनों ही नेता जल्द ही इस पर एक्शन ले सकते हैं।

पुलिस अधीक्षक द्वारा मीडिया की आवाज को दबाने का भी किया गया प्रयास
आईपीएस नगेन्द्र सिंह के कार्यकाल में मीडिया पर दबाव बनाने के लिए मीडियाकर्मियों पर भी मामले दर्ज कर दिए गए ताकि पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में उनकी पुलिस कुछ भी गोरखधंधा करती रहे और मामला दर्ज होने के डर से मीडियाकर्मी अपनी कलम बंद कर दें और पुलिस के खिलाफ कुछ भी ना लिखें। कवरेज के लिए गए तीन पत्रकारों पर रातों रात मामला दर्ज करवा दिया गया और फरियादी बने खुद पुलिसकर्मी, जो रात के अंधेरे में अवैध वसूली कर रहे थे। वसूली के वीडियो बनाये जाने पर उन्होंने पत्रकारों के साथ जमकर मारपीट की और उनके ऊपर ही रातोंरात मामला दर्ज कर दिया। जबकि पत्रकारों द्वारा रात को ही पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट की सूचना आईजी एवं एसपी को दे दी थी। लेकिन पत्रकारों पर दबाव बनाने और कलम की आवाज को दबाने मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों को ही फरियादी बनाकर रात में ही संगीन धाराओं में गोरमी थाने में मामला दर्ज कर दिया गया। जबकि कई संगीन अपराधों में कई कई दिनों तक मामले ही पंजीबद्ध नहीं किये जाते। इसी थाने के सब इंस्पेक्टर पर व्यापारी से 41000 रुपये एवं दो मोबाइल फोन छुड़ाए जाने की शिकायत भी व्यापारियों द्वारा आईजी से की गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा सब इंस्पेक्टर को लाइन अटैच भी किया गया। इसके साथ ही एक अन्य पत्रकार के खिलाफ आवेदन आने पर बिना जांच किये तुरंत मामला दर्ज कर पत्रकार को जेल भी भिजवा दिया गया।

कांग्रेस द्वारा भी कार्यकर्ताओं पर झूठे मामले दर्ज किये जाने के पुलिस पर लगाये गए आरोप
हाल ही में कांग्रेस द्वारा भी प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर भिण्ड पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि पुलिस द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर झूठे मामले दर्ज कर उनपर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। और यह सब पुलिस अधीक्षक की निगरानी में हो रहा है। पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह के मंत्रित्व काल मे ही पुलिस अधीक्षक भिण्ड स्थानांतरित होकर आए अब वही पुलिस अधीक्षक को आढ़े हाथों ले रहे हैं। डॉ गोविंद सिंह एवं पूर्व विधायक हेमंत कटारे द्वारा संयुक्त रूप से बताया गया कि हाल ही में कई निर्दोष लोगों पर पुलिस ने फर्जी मामले दर्ज कर दिए हैं। जिनकी जांच कर उनके खात्मे की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक को सुधरने की चेतावनी भी दी गयी है। हालांकि कांग्रेस के समय मे एसपी जिले में आये इसीलिए शायद कांग्रेसी उनका ट्रांसफर नहीं चाहते। उनका कहना है कि हम यहीं रखकर उनको सही करेंगे।

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