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लाॅक डाउन और देश के मध्यम वर्ग की आर्थिक समस्याएं –

पिछले दो माह से जारी लॉक डाउन के कारण आम जनता के सामने काफी गंभीर समस्याएं आ खड़ी हुईं हैं, खासतौर पर मध्यमवर्ग इस समय बहुत ज्यादा ही परेशान हाल है क्योंकि उसे शासन के द्वारा ना तो कोई मदद प्रदान की गई है और ना ही उसके रोज़गार की पुनर्स्थापना की गई है। इन पिछले दो महीने में उसके पास जो कुछ भी जमा पूंजी थी, वह सब वो अब तक खर्च कर चुका है और मध्यम वर्ग का प्रत्येक नागरिक अब बहुत ही खस्ताहाल में है। उसके सामने अपने घर और अन्य प्रकार के लोन की ईएमआई , इसके अतिरिक्त बिजली का बिल, स्कूल और कॉलेज में बच्चों की फीस आदि कई सारी गंभीर आर्थिक समस्याएं आ खड़ी हुई हैं। पिछले दो माह से जहां प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में ही बंद है तो इस समय खासतौर पर मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लोगों के पास बिजली का बिल, स्कूल व कॉलेज की फीस तथा अपने लोन की ईएमआई को चुकता करने हेतु पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है। इस कारण से उनके सामने एक अजीब संशय की स्थिति आ खड़ी हुई है, विशेषत: मध्यम वर्ग के लोग संकोचवश ना तो किसी से मदद मांग सकते हैं और ना ही शासन द्वारा उन्हें कोई मदद अब तक प्रदान की गई है ।
देश की एक बड़ी जनसंख्या मध्यम वर्ग के रूप में आती है और देश की आय एवं आर्थिक समृद्धि में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है क्योंकि इसके ज्यादातर लोग प्रतिदिन के काम-काजी, छोटे एवं मझोले स्तर के दुकानदार और विभिन्न निजी संस्थानों में कार्य करने वाले लोग होते हैं। उल्लेखनीय है कि इस वर्ग के लोगों को बीपीएल, खाद्यान्न नि:शुल्क सेवा एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा जैसी कई सारी शासकीय सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है । इसी प्रकार से गरीब एवं निम्न वर्ग के लोगों के पास भी बिजली का बिल और अपने बच्चों की स्कूल की फीस जमा करने हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं है। आने वाले कुछ माह भी काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं और देश की आर्थिक स्थिति काफी अस्थिर रहने वाली है, इस लंबे समय में मध्यम वर्ग के लगभग ज्यादातर लोगों के सामने भी रोजगार के अवसरों के साथ आर्थिक संकट उत्पन्न होना अवश्यंभावी है, अतः केंद्र और राज्य शासन एवं उससे जुड़ी विभिन्न संस्थाओं को इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार विमर्श करना चाहिए और पिछले दो माह के विभिन्न प्रकार के लोन की ईएमआई, स्कूल व काॅलेज की फीस तथा बिजली आदि के बिल को या तो न्यूनतम कर देना चाहिए या फिर शून्य कर देना चाहिए, ताकि देश के मध्यम वर्ग की एक बड़ी जनसंख्या को इसका लाभ प्राप्त हो सके और वे आने वाले समय में अपने घर परिवार के साथ स्वस्थ व संयमित रहकर इस महामारी से लड़ने में सहयोग प्रदान कर सकें। मोहम्मद उवैस कुरैशी

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