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लॉक डाउन के बीच बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन, कैसे काबू होगा कोरोना?

परानिधेश भारद्वाज

वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इक्कीस दिन की लोक डाउन की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा अफरा-तफरी मजदूर वर्ग में मची है। प्रधानमंत्री ने तो लॉक डाउन की घोषणा महज 21 दिन के लिए की लेकिन मजदूर वर्ग के बीच अफवाहों ने भी घर कर लिया और उनको जो अफवाहें मिली वह यह कि लॉक डाउन दो से तीन महीने चलेगा। ऐसे में काम धंधे बंद हो जाने के बाद बेगार बैठने और भूखों मरने के डर से मजदूर वर्ग अपने परिवार सहित अपने अपने घरों को रवाना होने लगा। हालात यह बने कि कोरोना की रोकथाम के लिए ट्रेन और बसें बंद कर दिए जाने के बाद जिसको जो साधन मिल रहा है उसी से वह अपने अपने घरों को आने की कोशिश कर रहे हैं। अगर किसी को कोई साधन नहीं मिल रहा तो वह पैदल ही घरों की ओर निकल पड़े, यह परवाह किए बिना कि उन्हें सौ, दो सौ, पांच सौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा। ऐसे में अब सबसे बड़ा संकट सरकार के सामने भी है कि जिस महामारी को रोकने के लिए लॉक डाउन की घोषणा की गई थी वह आखिर कैसे सफल होगा?


बड़े-बड़े महानगरों से पलायन कर लोग छोटे-छोटे शहरों एवं कस्बों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में वहां के प्रशासन के लिए भी यह समय बेहद ही मुश्किल भरा लग रहा है। चंबल के छोटे से जिले भिंड की बात करें तो यहां भी हजारों की संख्या में मजदूर प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा मजदूर दिल्ली एवं गुजरात से आ रहे हैं। कई लोग तो बारह सौ किलोमीटर की यात्रा मोटरसाइकिलों से ही करके पहुंच रहे हैं तो कई लोग अपने परिवारों को लोडिंग ऑटो वाहन में बिठाकर पहुंचे हैं। यहां पहुंचकर यह लोग जिला अस्पताल में अपनी कोरोना स्क्रीनिंग करवा रहे हैं ताकि वह अपने आस पड़ोस में लोगों को बता सकें कि वह जांच करवा कर ही अपने घर पहुंचे हैं। रास्ते में सभी प्रकार के रेस्टोरेंट ढाबे बंद होने से लोगों को खाना पीना भी नसीब नहीं हो रहा है और वह भूखे प्यासे जैसे तैसे अपने घर पहुंचने की जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में कई समाजसेवी बाहर से आने वाले लोगों को दिन रात खाना खिला रहे हैं। भूखे प्यासे यह लोग भी खाना खाते हुए समाजसेवियों को धन्यवाद दे रहे हैं।

वहीं कई लोग ऐसे हैं जो पैदल यात्रा करते हुए भिंड पहुंचे हैं या भिंड से बाहर जा रहे हैं। ऐसे में जिला पुलिस बल भी उनकी मदद कर रहा है और जो भी खाली वाहन मिलते हैं उसमें लोगों को बिठाकर आगे तक पहुंचवा रहे हैं ताकि बीच रास्ते में फंसे यह मजदूर अपने अपने घरों को सुरक्षित पहुंच सकें। ऐसी ही पहल भिंड ट्रैफिक प्रभारी आदित्य मिश्रा द्वारा की गई। जिसमें समाजसेवी देवेश उर्फ़ सोनू शर्मा ने भी बड़ी संख्या में ऐसे मजदूरों को ट्रकों सहित अन्य वाहनों में बिठाकर उनके गंतव्य तक पहुंचाने में मदद की।

वहीं राम श्याम ट्रेवल्स के संचालक विश्व प्रताप सिंह उर्फ विष्णु ने भी छह बसें जिला प्रशासन को निशुल्क मुहैया कराई जिनमें बैठकर मजदूर अपने अपने घरों को रवाना हुए।

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