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क्या बीजेपी ज्वाइन करना होगी सिंधिया की सबसे बड़ी भूल? क्या सिंधिया को आत्मसात कर पाएगा कमल का फूल? या फिर नई पार्टी बनाकर भाजपा को समर्थन देना होगा हितकर?

परानिधेश भारद्वाज,

मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच एक बात सामने आ रही है कि कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया जल्द ही भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेकर उसमें शामिल हो सकते हैं। लेकिन क्या भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना सिंधिया के लिए हितकर होगा या फिर यह उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी? यह सवाल सभी के जेहन में कौंध रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया का अचानक से भाजपा में शामिल होने का निर्णय उनके समर्थकों को भी रास नहीं आ रहा है। सिंधिया के कट्टर समर्थकों की बात करें तो वह आंख मूंदकर सिंधिया का साथ देने के लिए तैयार हैं। और इसी के चलते बड़ी संख्या में सिंधिया समर्थकों ने सिंधिया के इस्तीफे के बाद अपने अपने इस्तीफे भी सौंप दिए। लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि अगर सिंधिया भाजपा में जाते हैं तो उनके समर्थकों को भी भाजपा में ही शरण लेनी होगी। ऐसे में जिस विचारधारा के विरोध में वह हमेशा बोलते आए हैं उसी में वह कैसे घुल मिल पाएंगे? यह उनके सामने सबसे बड़ी दुविधा है। सिंधिया के लिए तो भाजपा कोई दूर की पार्टी नहीं है, उनकी दादी जनसंघ में शामिल रहीं थीं तो दोनों बुआ पहले से ही भाजपा में शामिल हैं और यहां तक कि मुख्यमंत्री तक रही हैं। ऐसे में सिंधिया के लिए भाजपा को आत्मसात करना या फिर भाजपा के लिए सिंधिया को आत्मसात करना कोई बड़ी बात नहीं होना चाहिए। लेकिन यहां पर सवाल विचारधारा का है और ऐसे सिंधिया समर्थक कट्टर कांग्रेसी जो हमेशा भाजपा को अपनी विरोधी पार्टी मानते आए हैं उनके लिए भाजपा में जाना बड़ा मुश्किल भरा है।

भाजपा में शामिल होने की जगह पार्टी बनाना रहेगा हितकर?

सिंधिया समर्थकों और राजनैतिक पंडितों द्वारा भी कहा जा रहा है कि सिंधिया अगर भाजपा ज्वाइन करने की जगह अपनी नई पार्टी बना कर भाजपा को समर्थन देंगे तो वह उनके और उनके समर्थकों के लिए हितकर होगा। सिंधिया को तो भाजपा आत्मसात कर लेगी, लेकिन क्या सिंधिया समर्थकों को भाजपा के कार्यकर्ता आत्मसात कर पाएंगे? यह सबसे बड़ी चुनौती है। और इसीलिए कहा जा रहा है कि यदि सिंधिया भाजपा में शामिल होने की जगह अपनी पार्टी बनाकर भाजपा को समर्थन देते हैं तो यह उनके लिए और उनके कट्टर समर्थकों के लिए हितकर होगा। समर्थन देकर धीरे धीरे एक बार अच्छे से भाजपा में घुल मिल जाएं, फिर बेशक बाद में भाजपा मय हो जाएं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के कई सहयोगी या समर्थक ऐसे हैं जो हाल फिलहाल ही उनसे जुड़े हैं। ऐसे में उनके लिए सबसे बड़ी दुविधा की स्थिति है कि वह किधर जाएं? कांग्रेस के साथ रहें या फिर अपने महाराज का साथ दें? इस दुविधा में कई लोग तो मीडिया से भी बात करने में कतरा रहे हैं।

कुछ कट्टर सिंधिया समर्थकों ने तुरंत दे दिया कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा
ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा मंगलवार को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद ग्वालियर चंबल अंचल के कई कट्टर सिंधिया समर्थकों ने तुरंत अपने इस्तीफे सौंप दिए। मुरैना और श्योपुर जिलाध्यक्षों द्वारा अपने समर्थकों के साथ इस्तीफे सौंप दिए तो वहीं भिण्ड जिलाध्यक्ष जयश्री राम बघेल ने सिंधिया की बजाय कांग्रेस पार्टी में आस्था जताते हुए इस्तीफा नहीं दिया। लेकिन जिले के कई बड़े कांग्रेसी नेताओं ने अपने इस्तीफे कांग्रेस आलाकमान को सौंप दिए। जिनमें मुख्य रूप से कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और विधानसभा प्रत्याशी रहे डॉ रमेश दुबे, जिला महामंत्री डॉ तरुण शर्मा, यूथ कांग्रेस के प्रदेश सचिव प्रिंस दुबे, पूर्व विधायक शिवशंकर समाधिया, पूर्व विधायक हरी सिंह नरवरिया, महामंत्री रविन्द्र नरवरिया, किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष जगदीश प्रशाद शर्मा, एमपीपीसीसी सदस्य राजेश भदोरिया, सेवादल जिलाध्यक्ष विकाश शर्मा, सिद्धार्थ जैन, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष शर्मा आदि सहित बड़ी संख्या में सिंधिया समर्थक कार्यकर्ता शामिल रहे।

कुछ इस प्रकार से लिखकर सौंपे सिंधिया समर्थकों ने इस्तीफे

“जिस प्रकार से मध्यप्रदेश में कांग्रेस हाईकमान ने लोकप्रिय नेता की अनदेखी कर पार्टी के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया, तब लोकप्रिय नेता श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने कांग्रेस पार्टी से स्तीफा दिया है, हम सब लोग भी 30 वर्ष के लम्बे समय के बाद कांग्रेस की प्राथमिकता सदस्यता से सिंधिया के समर्थन में अपना स्तीफा देते हैं”

कौन कांग्रेस के साथ और कौन सिंधिया के साथ? जल्द हो जाएगा दूध का दूध पानी का पानी

सिंधिया द्वारा कांग्रेस छोड़े जाने के बाद ग्वालियर चंबल अंचल में चल रहे इस्तीफों के दौर के बाद जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि कौन कट्टर कांग्रेसी हैं और कौन कट्टर सिंधिया समर्थक।

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