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बाबा भारती, क्रूर डकैत खड़क सिंह और पशुपालन विभाग

श्रीगोपाल गुप्ता

सत्ता के मद में नशे में चूर जिले के प्रभारी और प्रदेश के पशुपालन मंत्री व जिला प्रशासन के ईशारे पर पशुपालन विभाग के उप संचालक डा. सुरेशचंद्र शर्मा ने एक अनोखा और गंदा कांड कर डाला! जिससे मानवता तो शर्मसार हुई ही साथ में दीन-हीन और गऊ माता की तन-मन-धन से सेवा करने वाले समाजसेवियों की आस्था को भी जोर का झटका लग गया ! डा. सुरेशचन्द्र शर्मा ने देवरी गौशाला में गत 17 अगस्त को बड़ी संख्या में मरी गायों के लिए बेकसूर सेवाभावी दर्जन भर समाजसेवियों को जिम्मेदार मानते हुये उनके खिलाफ थाना सिविल लाइन में एक एफआईआर दर्ज कराते हुये उन्हें पशु क्रूरता के कलंक से निरुपित कर दिया! इस भीभत्स कृत्य से एक बहुत पुरानी कहानी की याद आ गई ! “हार की जीत”बाबा भारती और क्रूर डकैत खड़क सिंह की वो कहानी आपने भी बचपन में पढ़ी जरुर होगी! एक गांव में बाबा भारती रहते थे, वे काफी दयालु और परोपकारी संत थे! उनके पास एक नायाब और बलशाली सुन्दर घोड़ा था जिसकी धूम आसपास के क्षेत्रों में मची हुई थी!उसी क्षेत्र में एक क्रूर डकैत खड़ग सिंह का बहुत आंतक था! जब उसने घोड़े की तारीफ सुनी तो वो बाबा से उस घोड़ों हथियाने की योजना बनाने लगा! आप लोगों ने आगे पढ़ा होगा की खड़ग सिंह ने एक रोज लाचार मरीज बनकर जब बाबा तफरी करने के लिए अपने घोड़े पर बैठकर रास्ते से गुजर रहे थे, तो उसने बाबा से कहा कि उस बीमार लाचार को बाबा बैध तक ले चलें! और फिर बाबा के द्वारा उसे घोड़े पर बिठाकर ले जाने की और घोड़े को हथियाने की कहानी भी आपने पढ़ी होगी! बाबा ने बस इतना कहा कि खड़ग सिंह कोई बात नहीं है मगर कभी लाचार और बीमार बन कर इस तरह का धोखा मत करना ,क्योंकि इससे लोगों की लाचार और बीमार के प्रति मदद करने की भावना खतम हो जायेगी! क्या इस देवरी गौशाला के प्रकरण में डा. सुरेशचन्द्र शर्मा ने पुनः क्रूर खड़ग सिंह जैसा ही काम नहीं कर दिया?

देवरी गौशाला जिसकी कुल क्षमता चार सौ-पांच सौ के आसपास है! मगर इन्ही प्रभारी मंत्री जी ने इसी साल जनवरी में अपने मुरैना दौरे पर आदेश दिये थे कि मुझे सड़क पर गौवंस दिखाई नहीं देना चाहिए! कारिंदों ने तत्काल आदेश का पालन किया और रातों-रात कई हजार निरीह गायों, साड़ों को देवरी गौशाला के हवाले कर दिया! मगर गौशाला में न चारे की समूचित व्यवस्था और न ही चार हजार गौवंस के लिए जो जरुरी व्यवस्था होनी चाहिए वो कुछ नहीं हुआ! परिणाम सामने हैं प्रत्येक दिन गायों की मौतों का जो शुरु हुआ आज तक जारी है! अपने आदेश का पालन होते देख मंत्री जी गदगद हो गये! मगर चार हजार गौवंस के चारे और अन्य व्यवस्थाओं का ख्याल माननीय मंत्री जी ने भी नहीं किया! गौशाला में प्रशासन द्वारा एक नायाब तहसीलदार प्रशासक के तौर पर और पशुपालन विभाग द्वारा गौवंस की देखरेख के लिये दो डाॅक्टर नियुक्त हैं तो निगम के करीब दो दर्जन अधिकारी कर्मचारी यहां तैनात हैं,जो शासन और निगम से भारी-भरकम वेतन हड़पते हैं! बावजूद इसके गायों की मौतों के लिए दोषी वे समाज सेवी जो अपनी गाढ़ी कमाई में से अपना और अपने बच्चों का हक मारकर गायों की सेवा करते हैं! मामला चाहें ठेकेदार द्वारा निगम से चारे के भुगतान न होने चारा बंद कर देने का हो या बरसात में भीगती गायों के टैंट गाड़ने का हो? ये समाज सेवी चारो पहर तैयार खड़े हैं, यदि जेब में धन न हो तो झोली फैलाकर जनता से मांगने को तैयार! बावजूद इसके जिनके जिम्मे गौशाला है वे सब पाक-साफ? जो सच्चे गौभक्त हैं वे ही गाय की मौत के असल जिम्मेदार? वाह क्या न्याय है?डा. सुरेशचन्द्र शर्मा जी जरा सा भी चिंतन या गौशाला का रिकार्ड खंगाला होता? तो आप पाते कि सबसे पहले आपके दोनों डाॅक्टर और वहां तैनात कामचोर अधिकारी व कर्मचारी ही असली दोषी होते और वही इस कलंक के सच्चे वारीस? मगर आपने तो सच्चे समाजसेवी और गऊ भक्तों को ही मुजरीम बनाकर कहानी के क्रूर डकैत खड़क सिंह जैसा अपराध कर दिया!

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