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आखिर कितनों की जान लेगा ये रेत-पत्थर माफिया?

श्रीगोपाल गुप्ता

मध्य प्रदेश का उत्तरी द्वार चम्बल के बेहड़ और चम्बल संभाग कुख्यात और खौफनाक डकैतों के आंतक साया जरुर पूरी तरह समाप्त हो गया है! मगर पिछले एक-डेढ़ दशक से चम्बल अवैध रेत उत्खनन और पत्थर माफियों के कहर से हलकान और दहशत में है!जबकि पुलिस और प्रशासन की बेरुखी और इन माफियाओं के प्रति हमदर्दी के कारण छोटे-छोटे मासूम बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग असमय दर्दनाक तरीके से दम तोड़ रहे हैं! ताजा दर्दनाक और दिल दहलाने वाला वाक्या गत दिवश जब सामने आया तब एक 10-12 वर्षिय मासूम बेटी सानिया अपने भाई सौरव के साथ सायकिल पर स्कूल से दाखिला करवा कर लोट रही थी कि एक नर पिशाच बेहरम रेत माफिया ने रेत से भरे अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से सायकिल को टक्कर मार कर दर्दनाक मौत दे दी! सानिया का सपना था कि इस मर्तबा वो किसी अच्छे स्कूल में दाखिला ले और पढ़ -लिखकर अपने परिवार और मुरैना जिले का नाम रोशन करे! फाटक बाहर मुरैना स्थित सर्वोदय स्कूल में एडमीशन लेकर वो अपने नये-नये ताजा सपनों की उड़ान भरकर खुशी-खुशी अपने भाई के साथ घर लोट रही थी तभी अचानक बेहरम भेड़िये रेत माफिया ने उसे अपने तेज गति से चल रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में ले लिया! घटना में बेटी सायना के पेट के ऊपर से हत्यारे ने ट्रैक्टर-ट्रॉली का पहिया निकाल चढ़ा दिया इससे मौके पर ही उसकी दर्रनाक मौत हो गई जबकि उसका भाई सौरव घायल हो गया! इस खौफनाक हादसे को जिसने भी देखा वो हतप्रभ रह गया,कुछ लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ने भागे मगर वो हमैशा की तरह अन्य माफियाओं की तरह भागने में सफल रहा! घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने तीन घंटे एम एस रोड पर जाम लगा दिया, इस पर पुलिस अधीक्षक डाॅक्टर असित यादव ने समझा-बुझाकर आश्वासनों की पोटली खोलकर जाम खुलवाया! तब कहीं जाकर जाम में फंसे लोगो ने राहत की सांस ली!

यहां सवाल यह नहीं है कि डाॅ. आसित यादव या उनके जैसे अन्य पुलिस अधीक्षक आश्वासन देकर निरीह मासूमों की लाश पर कब तक कफन डालते रहेंगे? प्रश्न यह है कि जानमाल के लिये जिंदा मौत बन चुके इन हैवान रेत माफियाओं के कहर से आम आदमी को कैसे बचायेंगे! दहशत अआ आलम यह है कि सरे आम कानून की धज्जियां उढ़ाते हुये तेज दौड रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली को देखखर आम आदमी दूर भाग रहा है तभी भी ये माफिया उसे चपैट में ले लेते हैं! ऐसा भी नहीं है कि अवैध उत्खनन से रेत और पत्थर ढो रहे इन माफियाओं के शिकार पुलिस, वन विभाग या प्रशासन के लोग नहीं बने हों! 2012 बैंच के आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र सिंह को बानमोर में एक पत्थर माफिया ने ठीक होली के दिन ट्राॅली से कुचल कर मार दिया! पुलिस आरक्षक धर्मेंद्र चौहान, वीर बहादुर सिंह, वीरेन्द्र सिंह जैसे अनेक पुलिस कर्मी भी इन माफियाओं के शिकार होकर असमय काल के गाल में समा गये या फिर जिंदगी भर के लिए अपाहिज होकर जीने के लिए मजबूर हो गये! इतना ही नहीं क्ई दफा मुरैना -भिण्ड में कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक और डीएफओ पर खुले आम गोलियां चलाकर इन माफियाओं ने अपनी ताकत का अहसास कराया है जो शासन-प्रशासन पर काला धब्बा है! उल्लेखनीय है कि घड़ियालों के संरक्षण के लिए चम्बल नदी से रेत उत्खनन पर माननीय मप्र हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और रोक का कढ़ाई से पालन हो इसके लिए एसएएफ पुलिस कई टुकड़ियां मुरैना, भिण्ड और श्योपुर जिले को दे रखी हैं, बावजूद इसके हजारों टन रेत प्रति दिन चम्बल से अवैध उत्खनन जारी है! जिसका परिणाम सामने है कि तेज चलती ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण मुरैना, भिण्ड व श्योपुर में आये दिन निर्दोष मासूम, जवान और बुजुर्ग इन ट्रैक्टर-ट्रॉली के शिकार हो कर असमय मौत के आगौस में समा रहे हैं! ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि शासन-प्रशासन की बेरुखी और हमदर्दी के आखिर कितनों की जान लेगा ये रेत-पत्थर माफिया?

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