Breaking News
Home / प्रदेश / मध्य प्रदेश / जनता की अदालत में “बज्जिर-टुडे” के संपादक

जनता की अदालत में “बज्जिर-टुडे” के संपादक

जनता की अदालत में ‘बज्जिर-टुडे’के संपादक’

वरिष्ठ पत्रकार श्रीगोपाल गुप्ता हाथ में कागज लिए अदालत में बज्जिर-टुडे पर आरोप लगा रहे हैं। सामने जजमेंट सीट पर बैठे हैं – प्रधान सम्पादक यूनिक-टुडे श्री आनंद त्रिवेदी
श्री गोपाल गुप्ता : जै गोपाल जी की माड़साब
बज्जिर सम्पादक : जै रघुनाथ जी की साब!
श्री गोपाल गुप्ता : आप पर गंभीर आरोप हैं…………
बज्जिर सम्पादक : पहलें कछू खाइबै दे देओ!!
बज्जिर सम्पादक : ठीक है। लीजिए हम आपको भुट्टों की माला अर्पित करते हैं।
बज्जिर सम्पादक : लिआऊ! हम टोरि-टोरि कैं खात रहेंगे!!!….अब पूछो!
श्री गोपाल गुप्ता : हाँ तो, आप पर गंभीर आरोप हैं…………
बज्जिर सम्पादक : हतैं !!
श्री गोपाल गुप्ता : सुन तो लीजिए…….आप पर आरोप है कि आप सीधा-सीधा कटाक्ष करते हुए डायरेक्ट व्यंग्य लिख देते हो, इससे कुछ लोग प्रसन्न हैं तो कुछ आहत भी होते हैं….
बज्जिर सम्पादक : आँ हाँ, होतैं!!!
श्री गोपाल गुप्ता : आप पर आरोप है कि आपने नगर-निगम की नाक में कोड़ी कर दी है। खासकर सभापति जी की। आप समस्याओं को ऐसे एंगल से उठाते हैं कि तिलंगा लग जाए।
बज्जिर सम्पादक : मैंने तो लुढ़कती गेंद में टल्ला दिया था। पहले से मुद्दे अखबारन में थे। मैं तो न्यूटन के नियम से बाहरी बल लगा रहा हूँ बस!!
श्री गोपाल गुप्ता : आरोप है कि अमिताभ बच्चन, राजकुमार और नाना पाटेकर की आवाज़ में सभापति को निशाना बनाया गया है!!
बज्जिर सम्पादक : किसकी आवाज़ में निशाना बनाया है ??????
श्री गोपाल गुप्ता : फिल्मी अभिनेताओं की !
बज्जिर सम्पादक : तो बिन तेई पूछो, मैं का करों??
श्री गोपाल गुप्ता : आप पर आरोप है कि आपने सिकरवारी और तोमरघार के गांवों के नामों को लेकर तीखा व्यंग्य बनाया है जिसका कड़ा विरोध हुआ है जिसके चलते आपको 15 दिन के लिए तोमरघार एकता मंच ने निलम्बित किया हुआ है। ऐसे में आप बज्जिर-टुडे में कुछ नहीं लिख सकते तो 15 दिन आप क्या कर रहे हैं –
बज्जिर सम्पादक : दिन काटि रए हैं, राति कटि जाति है
श्री गोपाल गुप्ता : आप पर आरोप है कि अगर तीसरा विश्व-युद्ध होगा तो बज्जिर-टुडे की वजह से होगा, आपका क्या कहना है !!
बज्जिर सम्पादक : आँ हाँ! है सकतु ए। भिरबै की का है चाएँ तैसे भिज्जाएँ मान्स! जि तो तामै मुरैनो ए!!!
श्री गोपाल गुप्ता : आरोप है कि आपने टीटू के बच्चे को कलाकंद कहा और टीटू की बहू के नाक-नक्श का भी अनुमान लगा लिया!!
बज्जिर सम्पादक : तुमाई का फूटि गईं हैं!!!!!! तुमऊ लगाऊ अनुमान!!!
श्री गोपाल गुप्ता : आरोप है कि आप सीधा नाम लिखकर व्यंग्य ठोंक देते हैं। पटवारियों को भ्रष्टाचार प्रशिक्षण देने के आप समर्थक माने जाते हैं। आपकी बजह से कपूर सिंह पटवारी में आग लग गई है।
बज्जिर सम्पादक : कपूर में आग!!!!!!! तो का बचतौ????
श्री गोपाल गुप्ता : आपकी वजह से कई लोगों का खून खौल रहा है क्या आपको मोबाइल फोन पर धमकी नहीं मिलती ??
बज्जिर सम्पादक : मैं फोन उठातई ना कऊ को!!!
श्री गोपाल गुप्ता : अगर कोई आपको ही उठाने आ जाए तो ????
बज्जिर सम्पादक : उठि जागें, बैठेई तो हैं!!
श्री गोपाल गुप्ता : आप पर प्राणघातक हमला भी हो सकता है !!
बज्जिर सम्पादक : बस! सोते हुए ना मारें और पीठ की तरफ से ना मारें। (पीठ में पीर है!!)
श्री गोपाल गुप्ता : तो आपका वैचारिक वध कैसे होगा ?
बज्जिर सम्पादक : भीष्म पितामह की तरह हम स्वयं बताएँगे!!!
श्री गोपाल गुप्ता : आरोप है कि एक तोमर मोड़ा ने यह कहा है कि ओछी मानसिकता वाले आदमी को डॉक्टर लिखना शोभा नहीं देता !!
बज्जिर सम्पादक : तो हटाय तो दई उपाधि!! औ बु मोड़ा अनफ्रेण्डऊ ना करौ, बाल-गोपाल हैं!!!! आप तो श्रीगोपाल हो।
श्री गोपाल गुप्ता : आरोप है कि आपने फर्जी पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा, उन पर भी भयानक कटाक्ष किए हैं, इस तरह तो आप हमारी बिरादरी के भी निशाने पर हो जाएँगे (वैसे तो हमारे लाड़ले हैं)
बज्जिर सम्पादक : फर्जियों पर किया है। आपकी बिरादरी थोड़ऊ ए!!
श्री गोपाल गुप्ता : आपने कांग्रेस हो या भाजपा किसी को नहीं छोड़ा?
बज्जिर सम्पादक : औ का! हमाए काजैं सिग एक-से हैं!! बैसें जो हमाए मन में आतै ताय चमकाय लेत हैं!!!
श्री गोपाल गुप्ता : आरोप है कि आपने नरेन्द्र सिंह जी पर भी खूब लिखा है ?
बज्जिर सम्पादक : कौन-से नरेन्द्र सिंह ?????
श्री गोपाल गुप्ता : क्या बज्जिर-टुडे प्रिंट रूप में कभी मिल सकेगा? इसका पंजीयन हो गया है क्या?? आशंका है कि कोई और इस नाम से कहीं पंजीयन ना करा ले !!
बज्जिर सम्पादक : कबहूँ को है गओ!!
श्री गोपाल गुप्ता : 15 दिन के निलम्बन में आप क्या खा रहे हैं !!
बज्जिर सम्पादक : पहले सोशल मीडिया पर डेढ़ जीबी डेटा खाते थे, निलम्बन के बाद 15 दिन गम खाय रहे हैं!!
श्री गोपाल गुप्ता : तो आपको सारे आरोप स्वीकार हैं ?
बज्जिर सम्पादक : हओ!
श्री गोपाल गुप्ता : मतलब आप मानेंगे नहीं, फिर और लिखेंगे??
बज्जिर सम्पादक : औ का!!
श्री गोपाल गुप्ता : बड़े बज्जिर हैं आप??
बज्जिर सम्पादक : हतैं !!
(जजमेंट सीट से आनंद त्रिवेदी तीन बार हथोड़ा दबाते हैं लेकिन मेज नहीं टूट पाती। डिसीजन देते हैं कि – ‘‘यह सम्पादक बड़ा बज्जिर है। इसे रोककर रखना ठीक नहीं है क्यों कि लिखेगा तो कुछ लोग मारेंगे, नहीं लिखेगा तो ज्यादा लोग मारेंगे। जेल में इसका आचरण ठीक होने के कारण इसकी सजा 5 दिन कम की जाती है। 15 जुलाई से यह चाहे तो बज्जिर-टुडे शुरू कर सकता है।)

About Unique Today

Check Also

शाहद्दतों को सलाम

Share on: WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *