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रात भर शराब बेचकर कहाँ पहुचाना चाहते हैं समाज को ?

विशेष-टिप्पणी : आनंद त्रिवेदी, प्रधान सम्पादक
रात भर शराब बेचकर कहाँ पहुँचाना चाहते हैं समाज को ?
आबकारी विभाग, मंत्री जी, कलेक्टर और एसपी के नाम पत्र
यूनिक-टुडे। ग्राउण्ड-एक्शन। रात ठीक 12 बजे का वक़्त। मुरैना शहर की एम एस रोड पर आमतौर पर सन्नाटा, जिसे चीरती हुई एक एम्बुलैंस अस्पताल की तरफ जा रही है। इस आधी रात के वक़्त अगर कुछ जारी है तो पुराना बस स्टैण्ड, शुक्ला होटल के बगल से मयखाने पर शराब की बोतलों की खनक। टीम यूनिक-टुडे की पड़ताल में यह साफ जाहिर हुआ कि नियम-कायदां की धज्जियां उड़ाते हुए निर्धारित टाइम के बाद भी आधी-आधी रात तक शराब की दुकानों से शराब की बिक्री बेधड़क चल रही है।
जहाँ आम आदमी, दुकानदार, बाजार और सुरक्षा के लिहाज से तमाम कवायद शासन-प्रशासन और पुलिस करती है वहीं रात-रात भर शराब बेचकर राजस्व लक्ष्यपूर्ति करने वाला आबकारी विभाग अपने ही नियम-कायदों का ठेंगा बता रहा और प्रशासन व पुलिस दोनों ही इस मामले में मूकदर्शक बने बैठें हैं। जाहिर है अगर शराब की दुकान बंद करने का समय 9 बजे तक है तो अपना वारदाना बगैरह समेटने में ज्यादा से ज्यादा 9.30 तक का समय लग सकता है। मगर नियम, कायदे को ताक पर रखकर शराब की दुकानों का आधी रात तक खुलना शहर के हर गली-मुहल्ले की महिलाओं, बच्चों और घरों को बरबाद करने की नापाक कोशिश है। देश के कई राज्य जब शराबबंदी की तरफ बढ़ रहे हैं वहीं मुरैना में इसके लिए जिम्मेदार अफसरान चुप्पी साधे बैठे हैं।
एक तरफ आप अपराध पर लगाम कसने की बाद करते हो और दूसरी ओर आधी रात को नशे में डूबा हुआ शराबी शहर बनाने पर तुले हो, अपराध तो स्वतः ही बढ़ेंगे! शराब की दुकानें 12-12 बजे तक खुलेंगी जिनके नियम साढे़ 9 बजे तक के हैं, सरेआम हो रही यह नियम-कायदों की अनदेखी समझ से परे हैं।
मुझे पता है हमारे शहर के हमारे बीच के ही लोगों के ये ठेके हो सकते हैं लेकिन अपने सम्बन्धों की खटास को छाती पर रखकर ये कठोर टिप्पणी मैं कर रहा हूं लेकिन क्या शासन-प्रशासन इस तरह बेशर्म हो कर शराब की दुकानें खोले रखने की जेहमत कर रहे हैं। अगर जरा भी मानवता, शर्म शेष बची है तो इसे तत्काल रोका जाए।
लगता है शराब ठेकेदारों से सौजन्य लेते लेते जिम्मेदार लोगों का डीएनए ही खराब हो चुका है कि उन्हें इन चीजों से जरा भी फर्क नहीं पड़ रहा है।

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