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देश के रक्तदाताओं के भी आईकाॅन हैं, हमारे बीरजू भाई

देश के रक्तदाताओं के भी आईकाॅन हैं, हमारे बीरजू भाई

श्रीगोपाल गुप्ता

महासभा द्वारा अगामी 30 जून को आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय रक्तदान शिविर में महासभा नेतृत्व ने गुजरात के बृजमोहन गुप्ता जी (बीरजू) को रक्तदान का सबसे बड़ा प्रेरणा श्रोत माना है। उनको हार्दिक सम्मान देते हुये महासभा की मासिक पत्रिका “दर्पण”ने भी मई माह के अंक के कवर पेज को अन्य 2 महान शख्सियतों के साथ-साथ उनको भी समर्पित किया है। इस दफा 30 जून को आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय रक्तदान शिविर के वे गुजरात मंडल के मुख्य प्रभारी मनोनीत किया है। महासभा द्वारा उनको मुख्य प्रेरणा श्रोत घोषित किया जाना और दर्पण परिवार का कवर पेज उनको समर्पित किया जाना बताता है कि बाकई में ब्रजमोहन गुप्ता जी केवल अपने समाज के रक्तदाताओं के ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष के रक्तदाताओं के भी आईकाॅन हैं। इसको सच भी बीरजू भाई ने ही 57 वर्ष की आयु में 119 दफा रक्तदान करके साबित किया है। किसी लाचार, मजबूर और गंभीर से गंभीर बिमारी से पीड़ित मरीज की जान बचाने के लिये जो इंतजामात भारत में उपलब्ध हैं वो सारे इंतजाम बीरजू भाई की मजबूत पकड़ में हैं। वर्षों से गुजरात सरकार की मदद अनेक कैंसर और हार्ट की गंभीर बिमारी से जूझ रहे मरीजों का फ्री में सर्जरी करवा कर ठीक करवा चुके हैं। इसके अलावा रक्तदान के साथ-साथ अभी तक वे 600 लावारीश शवों का विधी-विधान से अंतिम संस्कार कर चुके हैं। नमर्दा कैनाल से डूब के मर चुके लोगों की लाशों को ढूढ़ कर निकालने वाली डीझास्टर कमेटी के सदस्य के रुप लगभग 100 शवों को ढूंढ कर वे कैनाल से बाहर ला चुके हैं।

इदादत नगर (आगरा) से लगभग 100 वर्ष पूर्व वीरमगाम में शिफ्ट हुये परिवार में पिता रामकृष्ण गुप्ता और माता श्रीमती प्रेमीलाबेन के पुत्र के रुप में 27 जुलाई 1962 को जन्मे बीरजू भाई एक सच्चे समाज सेवक हैं।जिन्होने गुजरात में सन् 2001 में आये भंयकर भूकंप में कच्छ-भुर्ज के आघोई गांव में अपनी टीम के साथ सबसे पहले पंहुच कर अनेक लोगों को मलबों से निकालकर उनकी जानें बचाई। अपने छात्रजीवन में जनता के लिए अनेक आंदोलन में हिस्सा लेने वाले बृजमोहन गुप्ता सन् 1994 से लेकर 2004 तक शाखा सभा वीरमगाम के अध्यक्ष रहे, उसके बाद सन 2005 में स्व. श्री एससी पैगोरिया जी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकाल में गुजरात मंडल के मंडलाध्यक्ष भी रहे। उन्होने अपने कार्यकाल में वीरमगाम और गुजरात में माथुर वैश्य परिवारों को मजबूती देते हुये गुजरात की पुण्य भूमि पर महासभा का परिचम लहरा कर माथुर वैश्य समाज को एक नई पहचान दी। इसके साथ ही बीरजू भाई और उनकी टीम ने 200 से अधिक ‘नेत्रदान’ करवाये जो अपने आप में अभूतपूर्व और सराहनीय कदम है। वर्षों से समाज सेवा को समर्पित बीरजू भाई को उनकी धर्मपत्नी श्रीमती उर्मिला गुप्ता का भी पूर्ण सहयोग मिला। श्रीमती उर्मिला गुप्ता खुद भी एक बड़ी समाज सेवक हैं, जिसका जीता-जागता सबूत है कि वे 15 वर्षों से तीसरी दफा वीरमगाम नगर पालिका परिषद yhकी निर्वाचित व सर्वाधिक लोकप्रिय निर्दलीय पार्षद हैं। दर्जनों समाजसेवी संस्थाओं से जूड़कर समाज सेवा के जो नित नये आयाम बृजमोहन गुप्ता जी ने स्थापित किये हैं, उन पर महासभा और सम्पूर्ण माथुर वैश्य समाज को फक्र है नाज है। ऐसे सच्चे कर्मवीर जन सेवक योद्धा को बारंबार बधाई एंव शुभकामनाएं। भगवान उन्हें लंबी आयु और सुखद जीवन दे, ऐसी मंगल कामनाओं के साथ।

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