Breaking News
Home / क्राइम / आखिर उन निरीह महिलाओं का दोष क्या है ?

आखिर उन निरीह महिलाओं का दोष क्या है ?

आखिर उन निरीह महिलाओं का दोष क्या है?

श्रीगोपाल गुप्ता

गत बुधवार देर शाम को चम्बल के बेहड़ों का दुर्दांत व कुख्यात डकैत जगन गुर्जर उर्फ भैंडा ने एक पाशविक घटना को अंजाम देते हुए धौलपुर जिले के बसई डांक थाना अन्तर्गत गांव करनपुर-सायकापुरा में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाया। उसके और उसके साथियों द्वारा बंदूकों की नोक पर महिलाओं और उनके साथ मौजूद बच्चों की मारपीट भी की गई थी।जगन गुर्जर का कहना था कि इन महिलाओं के पतियों ने उसकी पुलिस से मुखबिरी की थी। ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि यदि उनके पतियों ने डकैत जगन गुर्जर की मुखबिरी की भी थी तो इसमें इन महिलाओं और बच्चों का क्या दोष था? दोष उस कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का भी नहीं है? बहुत बारीकी से यदि परीक्षण किया जाये तो दोष उस पुलिस और माननीय न्यायालयों में कार्यरत सरकारी अधिवक्ताओं का है जो दमदारी से ऐसे कुख्यात अपराधियों की जमानत का विरोध नहीं कर पाये या अन्य किन्ही कारणों से भैंडा के सामने आत्म समर्पण कर बैठे।ऐसे में देश के जब लाखों लोग जमानत के अभाव में जेलों में सड़ रहे हैं और उनमें से बहुतों की जमानत होनी चाहिए, मगर माननीय न्यायालय उनकी जमानत नहीं स्वीकारते।तब सवाल उठता है कि आखिर जगन गुर्जर जैसे दुर्दांत और मानव जाति पर कलंक की जमानत क्यों?हम माननीय भारतीय न्यायालयों का पूर्ण सम्मान करते हैं ,क्योंकि आज भी देश को आगे ले जाने वाले और भारतीयों के लगभग 70 फीसदी जरुरी मुद्दे माननीय न्यायालयों की सक्रियता के कारण ही सुलझते हैं। मगर भारत की उच्च नयायालयों का
जिम्मा संभाल रहे माननीय न्यायामुर्ती गण इस मामले को अपने संज्ञान में लेकर इस नरपशु के शर्मशार कर देने वाले जगन गुर्जर की बार-बार होने वाली जमानतों पर रोक लगा पायेंगे?क्योंकि पकड़े जाने पर जब तक मामलों का निपटारा न हो तब तक जमानत न हो तभी इसके खौफ और काले कारनामों पर रोक संभव लगती है ?

क्योंकि ये सर्वविदित नियम है कि जिस अपराधी या कुख्यात बदमाश ने एक या दो दफा जमानत का उल्लघन कर दिया हो तो फिर मामले के निपटने तक उसको जमानत नहीं मिलती। फिर क्या कारण है कि सन् 1994 में अपनी बहन व जीजा पर हुये अन्याय के खिलाफ न्याय न मिलने पर चम्बल की शरण आया जगन गुर्जर कम से कम अब तक चार मर्तबा जमानत का उल्लघन कर चुका है और फिर भी उसको बार-बार जमानत मिलती रही हैं। आखिर वे कोन से जरुरी कारण थे जिसकी दम पर इस कुख्यात को जब ये चाहे तब जमानत उपलब्ध है जबकि जब-जब ये जमानत पर जेल छूटा इसने कहर ही बरपाया है। पूरे परिवार के साथ डकैत बना जगन गुर्जर अब तक तीन मर्तबा आत्म समर्पण कर चुका है मगर उसकी अपराध की भूख मिटती नहीं है। हाल ही में उसको लगभग 9 महिने बाद जमानत पर छोड़ा गया। मगर उसने दो दिनों बाद गत 12 जून बुधवार को बाड़ी शहर ,धौलपुर के करनपुर-सायकापुरा गांव और जिला करौली के एक गांव मावलपुर में महिलाओं से बदतमीजी करते हुये गोली-बारी की और व्यापारी और महिलाओं की पिटाई कर पूरे गांव में निर्वस्त्र घुमाया और इन तीन जिलों की हाईटेक पुलिस सोती रही। हद तो तब है जब धौलपुर के पुलिस अधीक्षक डकैत जगन गुर्जर पर महिलाओं के अपमान का मामला धारा 354 के तहत अपराधिक इरादे से किसी महिला पर हमला करना और उसका अपमान करना तो मान रहे हैं। मगर देश-प्रदेश और उसका घर वालों द्वारा बताया जाना कि उसने निर्वस्त्र गांव में घुमाया को खारिज कर रहे हैं, आखिर क्यों?सवाल की जद में पुलिस और सरकारी अधिवक्ता इसी लिये भी आते हैं, क्योंकि मप्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लगभग 80 जघन्य मामलों में जिनमें 24 से ज्यादा हत्यों के शामिल हैं और कुख्यात डकैत जगन गुर्जर जमानत पर खौफनाक जुर्म पर जुर्म करता जा रहा है।

About Unique Today

Check Also

CM हैरान मंत्री परेशान और विधायकों में घमासान ।।।।

श्रीगोपाल गुप्ता देश की सबसे तेज गति से दौड़ने वाली “तेजस एक्सप्रेस” से भी तेज …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *