Breaking News
Home / लेख / सच लिखने में माहिर थे, स्वर्गीय त्रियुगी नारायण शर्मा

सच लिखने में माहिर थे, स्वर्गीय त्रियुगी नारायण शर्मा

साफ नियत का लेखन ही असरकारक होता है
सच लिखने और उसे मनवाने में माहिर थे स्व. शर्मा
श्री त्रियुगीनारायण शर्मा की १९ वी पुण्यतिथि पर विशेष

पत्रकारिता और अखबार का लेखन तब तक असरदार होता है जब तक उसकी नियत साफ हो। उद्देश्य परक रहता है। एक ईमानदार अखबार और ईमानदार लेखन लोगों में विश्वास पैदा करता है। एवं निष्पक्ष अखबार का स्थान अलग ही होता है। ऐसा मानना था स्व. त्रियुगी नारायण शर्मा का ।
6 जून आज ही के दिन सन् 2001 में भिण्ड जिले के एक महान विचारक, पत्रकार, वकील, समाजसेवी श्री त्रियुगी नारायण शर्मा का महाप्रयाण हुआ था। स्व. त्रियुगी नारायण शर्मा जहां पत्रकारिता में निष्जात थे ही साथ लेखनी के पक्के अभिभाषक थे। उनकी लेखनी सत्य के साथ-साथ सशक्त थी। उनकी भाषा पक कर इतनी गाड़ी हो चुकी थी कि समाचारों के तथ्यों को आपस में ऐसे जोड़ती जाती थी कि वह अलग नहीं होते। उनकी व्यंगात्मक और सटीक लेखन के एक-एक शब्द रह रहकर याद आते हैं। आज की पत्रकारिता के युग में वह अपवाद हैं। वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक निरंतर क्षरित होती पत्रकारिता पर चिंतित रहे।
साधरण ग्रामीण परिवा में पले बड़े स्व. श्री शर्मा का जन्म 23 सितंबर 1932 में भिण्ड के ग्राम विलाव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा विलाव में ही हुई। कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिखने लगते हैं। और यह कहावत चरित्रार्थ भी हुई। जब प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही शिक्षक शिवलाल पाण्डे जी ने उनकी प्रतिभा को देखा और परखा। कक्षा 9व 10 की शिक्षा गुरु सरदार सिंह सेंगर आदि के सानिध्य में हुई। देश आजाद होने के बाद देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत स्व. श्री शर्मा 1948-49 में समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए। जहां उनका सम्पर्क डॉ लोहिया, अगोर मेहता, आचार्य कृपलानी आदि से हुआ। और यहीं से उनके राजनीतिक जीवन को भी गति मिली।
इस बीच भाषा पर नियत्रण और निर्भीकता के कारण स्व. त्रियुगी नारायण शर्मा ने पत्रकारिता को अपना हथियार बनाया। उन्होंने साप्ताहिक रफ्तार का प्रकाशन प्रारंभ किया। जो बाद में तकनीति कारणों से बन्द हो गया।वाद में उन्होने उदग़ार साप्ताहिक फिर दैनिक का प्रका्र्रशन किया जिसके वर्तमान में तीन संस्करण भिण्ड, ग्वालियर, इटावा से प्रकाशित होरहे है । पूरा भिण्ड जिला 1959 के समय डाकू समस्या परेशान था। इस पीड़ा को समझ कर आचार्य विनोवाभावे द्वारा डाकुओं से सम्पर्क की बात की गई जिसमें स्व. शर्मा की भूमिका सराहनीय रही। डाकू समस्या के समाधान हेतु यदुनाथ सिंह पहली बार जब भिण्ड आये तो स्व. शर्मा के सथ गंजाधर सिंह कुशवाह, श्रीनाथ गुरु, डाकू मान सिंह की ससुराल तक गए। वह भिण्ड जिले के विकास के लिए सदैव ही चिन्तनशील थे।
स्व. शर्मा समझौतावादी न हो कर दृढ़प्रतिज्ञ व्यक्ति थे। स्व. शर्मा के बारे में किसी ने लिखा था कि साधारण काया के असाधारण व्यक्ति थे। अपनी बात कब और किस तरह कहना है इसकी उन्हें महारथ हासिल थी। स्व. शर्मा की पत्रकारिता के 52 वर्षों की लम्बी साधना के दौरान कई बार ऐसे अवसर भी आए जब वह अपनी लेखनी के साथ समझौता कर अपनी व अपने परिवार की आर्थिक काया पलट कर सकते थे किन्तु उन्होंने पैसों की खातिर बिक जाने से ज्यादा अपने सिद्धांतों पर टिके रहने को ही प्राथमिकता दी। कहते हैं कि चिराग का धर्म है रोशनी करना , इसी तरह थे स्व. श्री शर्मा। चाहे वह पत्रकारिता के क्षेत्र में हो, चाहे वह समाजवादी और कांग्रेस पार्टी में होते हुए राजनीति में या फिर समाज सेवा का क्षेत्र हो। वकालत जैसे पेशे में होते हुए भी उन्होंने अन्यायी का साथ कभी नहीं दिया। उन्होंने सदैव ही जुल्म, अत्याचार, शोषण के विरुद्ध न सिर्फ अलख जगाई बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचाया भी। इसी कारण कई बार जहां किसी दूसरे की लड़ाई में मदद करने जाते और स्वयं पार्टी बनकर लड़ाई अपने ऊपर ले लेते थे। वह परिणामों से कभी नहीं डरते थे। बात सही हो फिर सब कुछ उनका। स्व. शर्मा की 1९वीं पुण्यतिथि पर उनके आर्दशों, उनके द्वारा दिखाए शुरु किए गए कार्यों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

About Unique Today

Check Also

भाजपा सरकार को भी देश में वर्तमान में चल रही समस्याओं का समाधान करना चाहिए :

देश की जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत से जिताया है अब भाजपा सरकार को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *