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चम्बल की धरा मुरैना से चुनौती देंगे नरेन्द्र सिंह

 

श्रीगोपाल गुप्ता

मध्यप्रदेश,चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों में महान मुकाबला घमासान 2019 शुरु हो गया है। तमाम एक्जिट पोल के नतीजों के अनुसार बहुमत से कुछ कदम दूर रहने की भविष्यवाणी के मध्य ए नजर भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत प्राप्त करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। इसी का परिणाम है कि मुरैना-श्योपुर संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से सात हारने वाली भाजपा अब कोई रिस्क उठाने के मूढ़ में कतई नहीं है। इसी को देखते हुए आसन्न लोकसभा चुनाव में संभावना प्रबल हैं कि पार्टी यहां से कद्दावर नेता और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के नाम पर मोहर लगा सकती है। तोमर 2009 में यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व प्रदेश मंत्री व पूर्व विधायक रामनिवास रावत को हराकर भाजपा का परचम फहरा चुके हैं। चूकि 2014 में वे अपनी मूल राजनीतिक कर्मभूमि ग्वालियर लोट गये थे और वहां से वर्तमान में सांसद होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में केन्द्रीय मंत्री हैं। तोमर का नाम आगे आ जाने से टिकट के लिए अपना दावा ठोक रहे अन्य नेता सांसद अनूप मिश्रा, पूर्व जिला अध्यक्ष नागेन्द्र तिवारी, डा. केएन मिश्रा, मनीष शर्मा सहित सभी खामोश हो गये हैं। अगर सूत्रों की मानी जाये तो केन्द्रीय मंत्री को यहां से चुनाव में उतारने की तैयारी पार्टी बिगत दो महिने से कर रही थी। इस दौरान जिलाध्यक्ष मुरैना, महिला जिलाध्यक्ष आनन-फानन में तोमर की पंसद से बदले गये और लोकसभा प्रभारी,विधानसभा प्रभारी सहित संयोजक व अन्य महत्वपूर्ण पद भी उनकी पंसद से तय किये गये,मतलब सारी जमावट उनके चुनाव लड़ने के लिये ही की गई। समझा जाता है कि इस दफा मुकाबले में नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर में पिछड़ सकते हैं? क्योंकि गत लोकसभा चुनाव में वे ग्वालियर से काफी कड़े संघर्ष में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री अशोक यादव से मात्र 29 हजार वोटों से जीत पाये थे। जबकि हाल ही में विधानसभा चुनाव में ग्वालियर से हारे पार्टी कई दिग्गजों ने अपनी हार के पीछे नरेन्द्र सिंह तोमर को जिम्मेदार बताते हुये आरोप चस्पा कर दिये थे।

इसी को आधार मानते हुये पार्टी और स्वंय तोमर का मानना है कि इस मर्तबा भीतरघात का तगड़ा खेल खेला जा सकता है, इसके अलावा एंटीकमबैंसी का खतरा भी मंडरा रहा है। रही-सही कसर ग्वालियर -चम्बल संभाग में विधानसभा चुनाव में भाजपा को तगड़ी मार देने वाली कांग्रेस भारी जोश और उत्साह में आकर ग्वालियर से पूर्व केन्द्रीय मंत्री एंव कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नी श्रीमती प्रियदर्शिनी सिंधिया को चुनाव लड़ाने की मांग ने पूरी कर दी। हालांकि अभी तक पार्टी ने या सिंधिया ने महारानी के यहां से चुनाव लड़ाने का सीधा कोई संदेश नहीं दिया है, मगर लड़ाने से इनकार भी नहीं किया है।एक-एक सीट जीतने की कोशिश में लगी कांग्रेस विशेषकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए ग्वालियर का अच्छा-खासा महत्व है। ये महारानी के नाम का ही असर है कि महल विरोधी महान भाजपाई अब ग्वालियर से चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं रहे हैं और कन्नी काटते हुये दिखलाई दे रहे हैं। मगर यह सच है कि मुरैना-श्योपुर लोकसभा क्षेत्र केन्द्रीय मंत्री तोमर के लिये मुफीद है।पार्टी और स्वंय नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए यह काफी सुखद और बेहतरीन है कि तोमर के लिये लोकसभा क्षेत्र में पहचान का संकट नहीं है। वे न केवल मुरैना जिले की सीमा के आरम्भ बुधारा घाट से लेकर श्योपुर के कराहाल तक के भूगोल से परिचित हैं बल्कि कार्यकर्ताओं और आम आदमी की भी नाम से पहचान रखते हैं।परिसीमन के बाद पहली बार अनारक्षित हुई मुरैना-श्योपुर लोकसभा से सन् 2009 में नरेन्द्र सिंह तोमर अच्छे मार्जिन से विजयी रहे थे।तोमर का जन्म मुरैना जिले की सबसे बड़ी पंचायत रजौधा के औरेठी गांव में हुआ था, जो उनके स्थानीय होने का आहसास कराता है। निश्चित ही पार्टी में एक सामान्य और छोटे कार्यकर्ता के रुप भर्ती हुये तोमर का नाम आज पूरे अंचल में बड़ा नाम और कद वाला है। बावजूद इसके आठ में सात सीट जीतने वाली कांग्रेस तो उनके लिये कड़ी चुनौती होगी ही साथ में बहुजन समाज पार्टी ने भी उनकी राह भिण्ड के चार दफा के पूर्व सांसद रामलखन सिंह को पहले से ही मेदान में उतार कर कुछ हद तक संकरी
कर दी है। फिर भी यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि चम्बल की धरा मुरैना से चुनौती देंगे नरेन्द्र सिंह तोमर?

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