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दिल के अरमां आंसूओं में बह गये..

 

श्रीगोपाल गुप्ता

रविवार को कोलकाता में सीबीआई टीम और कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के बीच शारधा चिटफंड घोटाले में पूछताछ को लेकर हुये हाई वोल्टेज ड्रामा के पीछे बंगाल में राज्य सरकार का तख्ता पलट का ख्वाब देख रही भाजपा सरकार के दिल के अरमां आज सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आंसूओं में बह गये…..।दरअसल सन् 2013 में सामने आये करोड़ों के शारधा चिटफंड घोटाले जिसमें तीन राज्यों बंगाल, उड़ीसा और असम के सांसद, मंत्री और बड़े-बड़े राजनीतिक शामिल हैं, में रविवार को सीबीआई की एक टीम नियम विरुद्ध कोलकाता पुलिस कमिश्नर सन 1989 बैंच के सीनियर आईपीएस राजीव कुमार के घर उनसे पूछताछ करने के कोलकाता में धमक गई। मगर पुलिस कमिश्नर से मिलने के पहले ही कोलकाता पुलिस ने टीम को न केवल रोक दिया बल्कि गिरफ्तार कर हवालात -ए -दाखिल कर दिया। घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही राज्य की मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र व भाजपा मोदी की राजनीतिक शत्रु वन ममता बनर्जी घटना स्थल पर पहुंच गई और केन्द्र सरकार की धीमा-मस्ती के विरुद्ध रविवार रात को ही धरने पर बैठ गई। इसके साथ ही शीत का प्रकोप झेल रहे देश के राजनीतिक तापमान में अचानक गर्मी आ गई। एक तरफ जहां ममता को सम्पूर्ण विरोधी दलों का समर्थन मिलना शुरु हुआ तो भाजपा के सामने कोलकाता में संविधानिक संकट पैदा हो गया। संसद से सड़कों तक पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन ढूंढ़ रही भाजपा के नेता इस संकट के लिए राज्य की ममता सरकार को जिम्बेदार ठहराने लगी। इधर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने याचिका दायर करते हुये कोर्ट में पेश हुये साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाते हुये कहा कि कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार चिटफंड घोटाले से जुड़े इलैक्ट्रॉनिक्स सबूतों को नष्ट कर रहे हैं। इस पर जस्टिस आॅफ इंडिया माननीय रंजन गोगोई ने कहा कि आप सबूत पेश करें कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने सबूतों को मिटाया है या मिटाने के बारे में सोचा है तो हम ऐसी कड़ी कार्यवाही करेंगे कि उन्हें पछताना पड़ेगा। माननीय सीजेआई के इस की चेतावनी से केन्द्र सरकार की बांछे खिल गई कि मंगलवार को सीबीआई इसके सबूत पेश कर ही देंगे और जरुर कोई कड़ा आदेश देंगे। आनन-फानन में राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से पूरे घटनाक्रम में राज्य सरकार की भूमिका रिपोर्ट और उनकी अनुशंसा मंगा ली गई और सविंधान विशेषज्ञों से राज्य सरकार को भंग करने की पूरी रुपरेखा तैयार कर ली गई। मगर आज जस्टिस आॅफ इंडिया माननीय रंजन गोगोई की बैंच ने सीबीआई की कोलकाता पुलिस कमिश्नर की उसके समक्ष सरेंडर की मांग ठुकराते हुये केवल इतना सा आदेश दिया कि पुलिस कमिश्नर कुमार सीबीआई के समक्ष निकटवर्ती राज्य मेघालय के शिलांग में पेश हों और जांच में सहयोग करें। बाकि माननीय कोर्ट में रविवार को कोलकाता में हुये हाई वोल्टेज ड्रामा को कोई तज्जोबो नहीं दी और न ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने पर और उसमें शासकिय सेवक रहते शामिल हुये कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार पर कोई टिप्पणी ही की। इससे राज्य सरकार को गिराने की केन्द्र सरकार की मंशा धरी की धरी रह गई मतलब दिल के अरमां आंसूओं में बह गये…..

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