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झारखंड के दिव्यांगजन आरक्षण के पूर्ण लाभ से वंचितः राही

रांचीः रांची विश्वविद्यालय के प्रांगण में दिव्यांगजनों ने राज्य स्तरीय भव्य बैठक रखी जिसकी अध्यक्षता भारतीय नौजवान इंकलाब पार्टी सह डी. आर. डी फाउंडेशन के महासचिव शमशेर आलम राही ने कि अध्यक्षता करते हुए शमशेर आलम राही ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर आरक्षण के कई कानून व नीतियों के बावजूद झारखंड के दिव्यांगजन इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि सरकारी विभागों द्वारा दिव्यांग जनों के विषयों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है उनके लिए निर्धारित की गई आरक्षण का चार प्रतिशत के अनुसार नौकरियों में आरक्षण सही रूप से पालन नहीं हो रहा है। राज्य स्थापना के बाद आज तक जितनी भी नौकरियों मैं नियुक्ति की गई है उसमें आरक्षण रोस्टर का अनुपालन विभाग के संवर्ग क्षमता ( cadre strength) के आधार पर ना कर सिर्फ वर्तमान प्रकाशित पदों की संख्या पर दिया जा रहा है।
सरकारी परि पत्र होने के बावजूद विभागों द्वारा आरक्षण रोस्टर का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।

ऐसे में झारखंड के जो थोड़े बहुत दिव्यांगजन विषम परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा ग्रहण की है वे आज भी भी सरकारी नौकरियों के लिए भटक रहे हैं। पिछले 10 सालों में जितनी भी नियुक्तियां राज्य के अंदर हुई है सभी नियुक्तियों में कई दिव्यांग जनों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है और कुछ को उनके अधिकार प्राप्त हो रहे हैं और अधिकतर आज भी कोर्ट में अपने मुकदमे की लड़ाई कर रहे हैं। कई दिव्यांगजन ऐसे हैं जो आर्थिक कमजोरी के कारण कोर्ट भी नहीं जा पाते हैं।

झारखंड में आज तक दिव्यांग जनों के लिए सुयोग्य पदों का पहचान विभागों में नहीं की गई जबकि कई राज्यों में केंद्र की तर्ज पर पदों का पहचान कर वैसे पदों में उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है जो उनकी विकलांगता के लिए अनुकूल है। वैसे पद जो दिव्यांग जनों के लिए बिलकुल ही योग्य नहीं है उनका आरक्षण का प्रतिशत योग्य पदों में हस्तांतरित करने का प्रावधान है पर ऐसा राज्य में नहीं हो रहा है, पर है सारांश में नहीं हो रहा है।
केंद्र स्तर पर कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर आरक्षण संबंधित परिपत्र को राज्य में ना लागू किया गया और ना ही सोए झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग ने अपने परिपत्र जारी किए परिणाम स्वरूप आरक्षण संबंधित कई विवाद नियुक्ति एजेंसियों के साथ दिव्यांग जनों के हैं। झारखंड हाई कोर्ट में दिव्यांग जनों के आरक्षण से संबंधित कई मामले चल रहे हैं। क्या समाज का सबसे पिछड़ा वर्ग जो आर्थिक तौर से कमजोर है वह कोर्ट की लड़ाई लड़ पाएगा।
आज भी राज्य में दिव्यांग जनों के लिए हजारों आरक्षित पद खाली पड़े हुए हैं । उनकी बैकलॉग वैकेंसी को भरा नहीं जा रहा है इसे विशेष अभियान के तहत भरी जाने की आवश्यकता है । अस्थाई व कविता के आधार पर होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण का अनुपालन लगभग नहीं के बराबर हो रहा है।
देश के माननीय प्रधानमंत्री ने जहां विकलांग को दिव्यांग की सम्मानित उपाधि दी पर धरातल पर ऐसे सम्मान तभी उनको दिए जा सकते हैं जब उनके अधिकार उन्हें प्रदान की जाये। जबकि सरकार एक तरफ कहती है कि सबका साथ सबका विकास फिर दिव्यांगों का विकास कोन करेगा अभी हाई स्कूल की बहाली कि जारही है उसमें दिव्यांगजन क्वालिफाइड होते हुए भी जाँब से बाहर किये जारहे हैं तो यह कैसा विकास है।
झारखंड के दिव्यांग जनों को उपरोक्त विषयों पर सरकार से सकारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में बोकारो, धनबाद, रांची, जमशेदपुर, चतरा, हजारीबाग,गीरीडीह आदि जिलाें के दिव्यांगजन उपस्थित थे।

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One comment

  1. सही फोटो विकलांग अधिकारी मंच बिहार का है। न्यूज रांची का, फोटो बिहार का, मजा आ गया ।

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