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लोकसभा चुनाव की जंग शुरु

 

श्रीगोपाल गुप्ता

मध्य प्रदेश, इसी साल सभांवित अप्रैल -मई में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सभी प्रमुख दलों के बीच चुनावी जंग तेज हो गई है। इसमें भी भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच मामला ज्यादा ही गरम है। भाजपा जहां अगामी लोकसभा चुनाव में सर्वे और खुफिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर भारत विशेषकर हिन्दी क्षेत्र में होने वाले संभावित नुक्सान की भरपाई के लिए मुख्यतः पूर्वोत्तर राज्यों, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में जोर मार रही है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा को बंगाल में सफाये के लिए कमर कस रही हैं।दोनों के बीच सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जंग जारी है। दरअसल दिसंबर में भाजपा बंगाल अपनी राजनीतिक जमीं को तलाशने और मजबूती के लिए प्रदेश के तीन कोनों से 40 दिवसिय ‘गणतंत्र बचाओ रथ यात्रा’ निकालना चाह रही थी। मगर राज्य सरकार ने यह कहते हुये इजाजत नहीं दी कि भाजपा इस रथ यात्रा के बहाने प्रदेश के साम्प्रदायिक माहौल खराब करना चाहती है। इस नामंजूरी को चुनौती मानते हुये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ऐलान किया कि भाजपा को रथयात्रा निकालने से कोई नहीं रोक सकता।इसी के साथ भाजपा मामले को पश्चिम बंगाल उच्च न्यायालय में ले गई। जहां कोर्ट ने ममता बनर्जी को तगड़ा झटका देते हुये कुछ शर्तों के साथ रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी।इस अनुमति को भाजपा ने जिस प्रकार से उत्साह और गैर जिम्बेदारी के साथ उठाया, उससे तो एक दफा ऐसा लगा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा बंगाल में सबका सफाया कर देगी। इसको ममता ने भी अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते हुये राज्य सरकार की तरफ से हाईकोर्ट की बैंच में अपील कर दी।

इधर अनुमति मिलने के बाद खुद अमित शाह ने इसकी कमान सीधे अपने हाथों में ले लिया। बाकायदा इस अनुमति को बड़ी जीत मानते हुये तीन रथयात्रा प्रदेश के एक छौर कूचबिहार से ,दूसरी दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप से और तीसरी यात्रा 26 दिसंबर को बीरभूमि जिले के तारापीठ से निकालने की तैयारी युद्ध स्तर पर गैर बाजिव बयानबाजी से शुरु कर दी। तारापीठ और काकद्वीप दोनों स्थान हिंदू धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। वोटों के धुर्बीकरण की उम्मीद देखते हुए ममता बनर्जी द्वारा की गई याचिका पर बैंच ने भाजपा को दी गई अनुमति निरस्त कर दिया। ये निश्चित तौर पर भाजपा के लिये बड़ा झटका साबित हुआ, उसकी सारी राजनीतिक सिसायत बिखर गई। हांलाकि उसने सुप्रीम कोर्ट में बैंच के फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर दी है। इसी बीच ममता बनर्जी ने भाजपा 2019 फ़िनिश का नारा देते हुये अगामी 19 जनवरी को बिग्रेड मैदान में केन्द्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विशाल आमसभा का आयोजन कर दिया है। स्थिति यह है कि राजधानी कोलकाता सहित पूरा पश्चिमी बंगाल का माहौल ममतामय हो गया है। चारो तरफ तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के होल्डिंग और बैनरों से पाट दिया है। ममता बनर्जी का इस विशाल रैली के पीछे मकसद साफ है कि वे अपने कार्यकर्ताओं को अभी लोकसभा चुनाव की जंग के लिए तैयार कर दें और आमसभा में लगभग छह-सात लाखों की भीड़ एकत्रित कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को अपनी लोकप्रियता और दम का सीधा संदेश दे दें। बहरहाल कांग्रेस और बाममोर्चा चुनाव की तैयारियों में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस से काफी पीछे हैं तो भाजपा और ममता बनर्जी के बीच सीधी जंग जारी है। अब किसकी तैयारी किसको कितना कुछ देगी ?इसका फैसला तो चुनाव के बाद कुल 42 में से मिलने वाली सीटों पर ही होगा। फिलहाल भाजपा का केवल दो सीटों पर ही कब्जा है।

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